मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड ने इस बार सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मालवा अंचल समेत कई इलाकों में शीतलहर का जबरदस्त असर देखा जा रहा है। इंदौर में 67 साल का रिकॉर्ड टूट गया है, वहीं घने कोहरे ने सड़क और रेल यातायात को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और ठंड बढ़ने की चेतावनी जारी की है।
इंदौर में टूटा 67 साल का ठंड का रिकॉर्ड
मालवा अंचल में इस सीजन की सबसे सर्द रात दर्ज की गई है। इंदौर का न्यूनतम तापमान गिरकर 4.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो बीते 67 वर्षों में दर्ज सबसे ठंडे तापमानों में शामिल है। आमतौर पर पश्चिमी हवाओं के कारण यहां ठंड का असर सीमित रहता है, लेकिन इस बार मौसम प्रणाली में बदलाव ने ठिठुरन बढ़ा दी।
क्यों बढ़ी अचानक इतनी ठंड
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, राजस्थान के ऊपर बने प्रतिचक्रवात और कश्मीर से आ रही उत्तरी बर्फीली हवाओं के मिलने से ठंड में तीव्र बढ़ोतरी हुई है। साथ ही वातावरण में नमी की कमी और साफ आसमान के कारण रात के तापमान में तेजी से गिरावट आई है। पिछले दस वर्षों में इंदौर का न्यूनतम तापमान 6.6 से 11.6 डिग्री के बीच रहा, लेकिन इस बार ठंड ने पुराने आंकड़े तोड़ दिए।
जनवरी की शुरुआत और ज्यादा सर्द
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि जनवरी के पहले सप्ताह में तापमान सामान्य से 2 से 3 डिग्री तक नीचे जा सकता है। 30 और 31 दिसंबर से ठंड का असर और तेज होगा। हालांकि मावठे की संभावना नहीं है, जिससे भारी कोहरे की स्थिति कुछ हद तक सीमित रह सकती है। उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश में हल्का कोहरा अगले कुछ दिनों तक बना रह सकता है।
किसानों के लिए राहत की खबर
ठंड और साफ मौसम के चलते ओस गिरने की संभावना बढ़ गई है, जिसे रबी फसलों के लिए लाभकारी माना जा रहा है। मौसम विभाग का मानना है कि वर्षा नहीं होने से फसलों को नुकसान नहीं होगा।
कोहरे से ठप यातायात व्यवस्था
घने कोहरे ने ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में हालात बेहद मुश्किल बना दिए हैं। रात से सुबह तक सड़कों पर वाहन चलाना जोखिम भरा हो गया है। रेल यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई प्रमुख ट्रेनें 5 से 8 घंटे तक की देरी से चल रही हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।