मध्य प्रदेश से जुड़े राज्यसभा चुनाव विवाद ने अब राष्ट्रीय राजधानी में राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है। मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के विरोध में कांग्रेस के 61 विधायक और वरिष्ठ नेता दिल्ली में सत्याग्रह के बाद राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च कर रहे थे, जहां पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम के बीच सुप्रीम कोर्ट से भी मीनाक्षी नटराजन को राहत नहीं मिली है।
राष्ट्रपति भवन मार्च से पहले पुलिस की कार्रवाई
राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। जंतर-मंतर पर सत्याग्रह के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधायक और वरिष्ठ नेता राष्ट्रपति से मुलाकात की मांग को लेकर राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया और बाद में हिरासत में लेकर पुलिस वाहनों के जरिए थाने पहुंचाया।
राष्ट्रपति से मुलाकात नहीं होने पर जताई नाराजगी
हिरासत में लिए जाने के बाद विपक्ष के नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात की अनुमति नहीं मिलने पर नाराजगी जाहिर की। नेताओं का कहना था कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात महामहिम तक पहुंचाना चाहते थे। उनका दावा है कि राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से उन्हें मुलाकात संभव नहीं होने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया।
प्रदर्शन के दौरान नेताओं और पुलिस में बहस
राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए थे। इसी दौरान कुछ नेताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। मौके पर मौजूद नेताओं ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया, जबकि पुलिस ने निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका। कुछ देर तक चली नोकझोंक के बाद पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया।
नामांकन विवाद बना राजनीतिक टकराव का केंद्र
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद यह मामला लगातार राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस का आरोप है कि नामांकन प्रक्रिया में निष्पक्षता नहीं बरती गई, जबकि पार्टी इस मुद्दे को संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष उठाने की कोशिश कर रही है। इसी क्रम में राष्ट्रपति से मुलाकात की मांग की गई थी, ताकि पूरे मामले पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई जा सके।
सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
शुक्रवार को मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि नामांकन रद्द होने के बाद उपलब्ध संवैधानिक और कानूनी विकल्पों का उपयोग किया जा सकता है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि इस तरह के मामलों में उचित मंच का सहारा लिया जाना चाहिए। इसके साथ ही याचिका खारिज कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब इस मामले की अगली कानूनी और राजनीतिक दिशा पर सभी की नजरें टिकी हैं।