मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल लगातार तेज होती जा रही है। भाजपा द्वारा तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारने के बाद कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। पार्टी विधायकों की एकजुटता बनाए रखने पर विशेष फोकस कर रही है। इसी बीच विधायकों को मतदान तक दूसरे राज्यों में रखने की संभावना ने प्रदेश की सियासत को और गर्मा दिया है।
तीसरे उम्मीदवार के बाद बदले राजनीतिक समीकरण
राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भाजपा के तीसरे उम्मीदवार की घोषणा के बाद राजनीतिक समीकरणों में नई हलचल देखने को मिल रही है। इस फैसले के बाद कांग्रेस भी पूरी सतर्कता के साथ चुनावी तैयारियों में जुट गई है। पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह की राजनीतिक अनिश्चितता से बचना चाहता है और इसी वजह से संगठन स्तर पर लगातार बैठकों और चर्चाओं का दौर जारी है।
नामांकन से पहले नेताओं और विधायकों से संवाद
राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन से पहले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों के साथ लगातार संपर्क साधा गया। राजधानी में कई नेताओं से मुलाकात कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की गई। नामांकन प्रक्रिया के दौरान भी सभी विधायकों को मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि संगठनात्मक एकजुटता का स्पष्ट संदेश दिया जा सके।
विधायकों की बाड़ाबंदी की तैयारी
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नामांकन के बाद कांग्रेस अपने विधायकों को एक साथ रखने की रणनीति पर काम कर सकती है। इसके तहत उन्हें कर्नाटक के बेंगलुरू या तेलंगाना के हैदराबाद स्थित किसी रिसोर्ट में ठहराया जा सकता है। माना जा रहा है कि मतदान तक सभी विधायकों को एकजुट रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा सकता है।
खरीद-फरोख्त के आरोपों से बढ़ा सियासी तापमान
राज्यसभा चुनाव को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया है कि उनके विधायकों को प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही हैं। कुछ नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि विधायकों को आर्थिक प्रलोभन देने के प्रयास हुए हैं। हालांकि इन आरोपों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन इससे राजनीतिक माहौल जरूर गरमा गया है।
18 जून के मतदान पर टिकी नजरें
राज्यसभा चुनाव के लिए 18 जून को मतदान होना है। ऐसे में दोनों प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं। कांग्रेस का दावा है कि उसके सभी विधायक एकजुट हैं और पार्टी प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित है। वहीं भाजपा के तीसरे उम्मीदवार के मैदान में आने के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब सभी की नजरें मतदान के दिन होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हैं।