मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव 2028 भले ही अभी दूर हों, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है। पिछली चुनावी हार से सबक लेते हुए कांग्रेस अब आदिवासी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है। इसी कड़ी में पार्टी ने ‘ट्राइबल फॉर्मूला’ लागू करने का फैसला किया है, जिसके जरिए आदिवासी वोटर्स तक पहुंच बढ़ाने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने की रणनीति तैयार की गई है।
आदिवासी क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस
कांग्रेस का मानना है कि प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर आदिवासी मतदाता चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पार्टी अब आदिवासी बहुल क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने और मतदाताओं के बीच लगातार संवाद बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। इस रणनीति का लक्ष्य उन सीटों पर प्रभाव बढ़ाना है जहां आदिवासी वोट बैंक अहम माना जाता है।
केवल अपनी सीट नहीं, पड़ोसी सीटों की भी जिम्मेदारी
नई रणनीति के तहत आदिवासी नेताओं की जिम्मेदारी केवल उनकी विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगी। पार्टी ने तय किया है कि प्रभावशाली नेताओं को अपनी सीट पर संगठन मजबूत करने के साथ-साथ आसपास की विधानसभा सीटों पर भी पार्टी को मजबूती दिलाने के लिए काम करना होगा। इससे क्षेत्रीय स्तर पर बेहतर समन्वय और चुनावी तैयारी को गति मिलने की उम्मीद है।
संगठन की पूरी ताकत होगी मैदान में
कांग्रेस संगठन स्तर पर भी बड़े पैमाने पर सक्रियता बढ़ाने की तैयारी कर रही है। पार्टी का फोकस बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, आदिवासी समाज के बीच संवाद बढ़ाने और स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाने पर रहेगा। इसके लिए सांगठनिक ढांचे को नए सिरे से सक्रिय किया जाएगा।
इन नेताओं पर रहेगी बड़ी जिम्मेदारी
ट्राइबल फॉर्मूले को जमीनी स्तर पर लागू करने की जिम्मेदारी पार्टी के प्रमुख आदिवासी चेहरों को सौंपी गई है। इनमें नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, युवा नेता विक्रांत भूरिया और पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल प्रमुख रूप से शामिल हैं। पार्टी को उम्मीद है कि इन नेताओं के नेतृत्व में आदिवासी क्षेत्रों में संगठन की पकड़ मजबूत होगी और आगामी चुनावों के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सकेगा।
मिशन 2028 की दिशा में अहम कदम
राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस की यह नई रणनीति जमीनी स्तर पर कितना असर छोड़ पाती है। फिलहाल पार्टी ने साफ संकेत दे दिए हैं कि मिशन 2028 को लेकर उसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और आदिवासी वोट बैंक इस रणनीति का प्रमुख केंद्र रहेगा।