भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में जिला अध्यक्षों की नई नियुक्तियों को लेकर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। कई जिलों में कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया के जरिए विरोध दर्ज कराया है, जिस पर प्रदेश नेतृत्व सख्त हो गया है। पार्टी की ओर से कार्यकर्ताओं को चेतावनी पत्र जारी कर 24 घंटे के भीतर विरोध वाले पोस्ट हटाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही यह भी साफ किया गया है कि आदेश का पालन न करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस बीच प्रदेशाध्यक्ष ने भी छह महीने का अल्टीमेटम जारी कर नियुक्तियों को लेकर बड़ा बयान दिया है।
6 महीने में होगा काम का आकलन
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां संगठन सृजन अभियान के तहत की गई हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी पदाधिकारी के काम का मूल्यांकन छह महीने तक होगा। अगर कोई अध्यक्ष कसौटी पर खरा नहीं उतरता है, तो उसे हटाकर नए चेहरे को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसके अलावा जिन जिलों में अनुशासनहीनता या पिछले चुनाव में भीतरघात की शिकायतें हैं, वहां जांच भी की जा रही है।
कई जिलों में तीखा विरोध
नए अध्यक्षों की सूची जारी होने के बाद गुना, रीवा, सतना, इंदौर, उज्जैन, भिंड, अशोकनगर, दतिया, मंदसौर, मुरैना और बुरहानपुर जैसे जिलों में तीखा विरोध सामने आया है। इंदौर में सोशल मीडिया पर खुलकर नाराजगी जताई गई, वहीं मंदसौर और उमरिया में भी कार्यकर्ताओं ने आपत्ति दर्ज की है। विरोध की लहर को देखते हुए नेतृत्व ने सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की सख्त हिदायत दी है।
दिल्ली नेतृत्व की भूमिका पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, कई जिलों में अध्यक्षों के नाम दिल्ली स्तर से तय किए गए हैं। इनमें जयवर्धन सिंह, प्रियव्रत सिंह और कई अन्य नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि स्थानीय नेताओं की अनदेखी कर कुछ नाम सीधे दिल्ली से थोपे गए हैं। गुना और राजगढ़ में इसको लेकर सबसे ज्यादा गहमागहमी देखी जा रही है।
संगठन में बढ़ी खींचतान
जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों से जहां कई नेताओं का कद बढ़ा है, वहीं कई कार्यकर्ताओं में असंतोष गहराता जा रहा है। प्रदेश नेतृत्व अब सोशल मीडिया पर अनुशासन लागू कर संगठन में एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले छह महीने इन नए अध्यक्षों की कसौटी परखने का समय होगा।