मध्यप्रदेश के चर्चित कफ सिरप कांड में अब राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच कराने की मांग की है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि सिस्टम की विफलता का प्रतीक है। वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस जवाब दे कि इंडी गठबंधन सरकार के वक्त यह दवा कैसे बनी।
पीएम को लिखा पत्र, सिटिंग जज की निगरानी में जांच की मांग
दिग्विजय सिंह ने कहा कि छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत के पीछे कोल्ड्रिफ सिरप में मिले जहरीले तत्व डाई एथिलीन ग्लाइकोल की मात्रा तय सीमा से कई गुना अधिक पाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पहले से इस दवा की गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं की। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी कमेटियों की बैठकें साल 2013 के बाद से अब तक हुई भी या नहीं।
“सजा का प्रावधान हटाकर सिर्फ जुर्माना क्यों?”
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में दवा निर्माण में मिलावट के मामलों में सजा का प्रावधान हटाकर सिर्फ जुर्माना लागू कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि साल 2023 में बीजेपी को फार्मा कंपनियों से 945 करोड़ रुपए का चंदा मिला था, और यही वजह है कि फार्मास्यूटिकल टेस्टिंग को नजरअंदाज किया जा रहा है।
“जांच से पहले क्लीन चिट देना गलत”
दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि जब 2 सितंबर को पहले बच्चे की मौत हुई, तब जांच पूरी होने से पहले ही उप मुख्यमंत्री ने क्लीन चिट दे दी। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना जांच के क्लीन चिट कैसे दी गई और क्या ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री को इस्तीफा नहीं देना चाहिए था?
बीजेपी का पलटवार
इस पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेताओं का कहना है कि इंडी गठबंधन की सरकार के दौरान ही यह दवा बनी थी, तब कार्रवाई क्यों नहीं की गई? उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की SIT ने दवा बनाने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि कांग्रेस नेता सिर्फ राजनीति कर रहे हैं।