मध्य प्रदेश में साइबर ठगी के मामलों ने नई चिंता खड़ी कर दी है। क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि प्रदेश में होने वाली कई बड़ी ऑनलाइन ठगी के पीछे विदेशी नेटवर्क सक्रिय हैं। जांच के अनुसार चीन, कंबोडिया, हांगकांग, नाइजीरिया समेत 11 देशों के सर्वरों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। पिछले सात महीनों में विदेशी सर्वरों से जुड़े मामलों में करोड़ों रुपये की ठगी सामने आई है।
11 देशों के सर्वर से संचालित हो रहा साइबर ठगी का नेटवर्क
क्राइम ब्रांच की जांच में खुलासा हुआ है कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, ऑनलाइन लोन, केबीसी लॉटरी और मैट्रिमोनियल फ्रॉड जैसे मामलों में 11 देशों के सर्वरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि करीब 30 प्रतिशत मामलों का संचालन विदेशों से किया जा रहा है, जिससे अपराधियों तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बन गया है।
चीन, कंबोडिया और नाइजीरिया से जुड़े साइबर गिरोह
जांच के मुताबिक फर्जी निवेश और ऑनलाइन लोन से जुड़ी ठगी में चीन, हांगकांग और इंडोनेशिया के सर्वरों का सबसे अधिक उपयोग हो रहा है। वहीं डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर पैसे वसूलने वाले नेटवर्क कंबोडिया, फिलीपींस और थाईलैंड से जुड़े सर्वरों के जरिए सक्रिय बताए गए हैं। मैट्रिमोनियल फ्रॉड के मामलों में नाइजीरिया और कंबोडिया से जुड़े डिजिटल नेटवर्क की भी जानकारी सामने आई है।
देश के भीतर भी सक्रिय हैं साइबर ठग
विदेशी नेटवर्क के साथ-साथ देश के अलग-अलग राज्यों से भी साइबर अपराधी सक्रिय हैं। केवाईसी अपडेट, बिजली और पानी का बिल, क्रेडिट-डेबिट कार्ड अपडेट तथा सेक्सटॉर्शन जैसे मामलों में भारतीय सर्वरों और मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
ई-जीरो एफआईआर से सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
10 नवंबर 2025 से जून 2026 तक ई-जीरो एफआईआर प्रणाली के तहत 279 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 240 मामलों में औपचारिक केस दर्ज हुए। इस अवधि में हजारों शिकायतें प्राप्त हुईं, 124 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और करोड़ों रुपये की ठगी के मामलों की जांच की गई। जांच एजेंसियों ने बड़ी राशि फ्रीज करने के साथ कुछ रकम पीड़ितों को वापस भी दिलाई है।
विशेषज्ञ बोले- डिजिटल सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अपराधी विदेशी सर्वर, वीपीएन और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी पहचान छिपाते हैं, जिससे जांच जटिल हो जाती है। वहीं साइबर क्राइम अधिकारियों का मानना है कि साइबर अपराध अब अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का रूप ले चुके हैं। ऐसे में लोगों को अनजान लिंक, फर्जी निवेश योजनाओं और संदिग्ध कॉल या संदेशों से सतर्क रहने की जरूरत है।