मध्यप्रदेश के शिक्षा विभाग में एक चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है। खरगोन जिले में अधिकारियों ने एक ऐसे शिक्षक का तबादला कर दिया जो पांच महीने पहले ही इस दुनिया से विदा हो चुका है। यह मामला सामने आने के बाद शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मृत शिक्षक को मिली नई पोस्टिंग
प्रदेश में शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादले की प्रक्रिया जारी है। इसी क्रम में खरगोन के भगवानपुरा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ शिक्षक पूनम सिंह रावत का ट्रांसफर झिरन्या ब्लॉक कर दिया गया। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पूनम सिंह रावत का निधन 11 फरवरी 2025 को ही हो गया था। यानि जब तक नया सत्र शुरू होगा, तब तक उन्हें गुज़रे 5 महीने बीत चुके होंगे।
निलंबित शिक्षक का भी ट्रांसफर
इतना ही नहीं, विभाग ने एक और लापरवाही करते हुए निलंबित शिक्षक दिनेश पटेल का भी ट्रांसफर कर डाला। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या विभाग को यह भी पता नहीं कि किसकी सेवा चालू है और कौन पहले ही बाहर हो चुका है?
कितनी सतर्क है व्यवस्था?
इस घटना ने साफ कर दिया है कि तबादला प्रक्रिया में न केवल सतर्कता की कमी है, बल्कि रिकॉर्ड की सही जांच भी नहीं की जा रही है। एक मृत शिक्षक को नई नियुक्ति देना और एक निलंबित शिक्षक को स्थानांतरित करना, दोनों ही इस बात की गवाही हैं कि विभागीय लापरवाही चरम पर है।
अब उठ रहे गंभीर सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद से विभाग के जिम्मेदार अफसरों की जमकर आलोचना हो रही है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अब स्कूलों में मृतक शिक्षक पढ़ाएंगे? क्या शिक्षकों के रिकॉर्ड अपडेट नहीं होते? इस तरह की घटनाएं न केवल प्रशासन की छवि धूमिल करती हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती हैं।