उज्जैन, मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को उज्जैन जिले के डोंगला गांव में प्रदेश के पहले अत्याधुनिक डिजिटल तारामंडल का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला में एक राष्ट्रीय खगोलीय कार्यशाला का भी आयोजन होगा, जिसमें देशभर के वैज्ञानिक और खगोलविद् भाग लेंगे।
तारों की दुनिया का होगा रोमांचक अनुभव
डोंगला गांव में स्थापित इस आधुनिक प्लेनेटेरियम में एक बार में 55 लोग बैठकर आकाशगंगा, ग्रह-नक्षत्रों और अंतरिक्ष घटनाओं का अद्भुत अनुभव ले सकेंगे। वातानुकूलित इस तारामंडल को लगभग 1.6 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया है। इसमें 8 मीटर व्यास का डोम, ई-विजन 4 डिजिटल प्रोजेक्टर और डिजिटल साउंड सिस्टम लगाया गया है।
वराहमिहिर वेधशाला को मिलेगा नया विस्तार
इस तारामंडल का निर्माण आचार्य वराहमिहिर न्यास द्वारा अवादा फाउंडेशन के आर्थिक सहयोग से और कोलकाता के डीप स्काई प्लेनेटेरियम के तकनीकी मार्गदर्शन में किया गया है। 2013 में सीएम डॉ. यादव की पहल पर यहां वराहमिहिर वेधशाला की नींव रखी गई थी, जिसे अब देश के प्रमुख खगोल केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
खगोलीय दृष्टि से खास है डोंगला गांव
डोंगला गांव सिर्फ ऐतिहासिक नहीं, बल्कि खगोलीय दृष्टिकोण से भी बेहद खास है। यह गांव कर्क रेखा पर स्थित है, जिसके कारण यहां शून्य छाया जैसी अद्भुत घटनाएं देखी जा सकती हैं। सीएम यादव इस अवसर पर डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला में शंकुयंत्र के माध्यम से शून्य छाया का अवलोकन भी करेंगे।
विज्ञान, विरासत और विज़न का संगम
उज्जैन में यह तारामंडल न केवल बच्चों और विज्ञान के छात्रों के लिए शिक्षा का नया जरिया बनेगा, बल्कि यह खगोल विज्ञान, संस्कृति और तकनीक का संगम भी प्रस्तुत करेगा। यह पहल मध्य प्रदेश को विज्ञान पर्यटन में एक नई पहचान दिलाने की ओर बड़ा कदम है।