मध्य प्रदेश में नगरीय निकायों की चुनाव प्रणाली बड़ा बदलाव देखने जा रही है। नगरपालिका और नगर परिषद अध्यक्षों के चुनाव अब प्रत्यक्ष प्रणाली से होंगे, यानी लोग सीधे अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। विधानसभा सत्र में इस प्रस्ताव को बहुमत से पास कर दिया गया है। इससे 2027 के निकाय चुनावों में अध्यक्ष चुनने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। संशोधन बिल के दौरान राइट टू रिकॉल की समयसीमा को लेकर सदन में तीखी बहस भी देखने को मिली।
अध्यक्ष के लिए प्रत्यक्ष चुनाव की वापसी, बदलेगा पूरा तंत्र
मध्य प्रदेश में नगरपालिका और नगर परिषद अध्यक्षों के चुनाव अब प्रत्यक्ष वोटिंग के आधार पर होंगे। अब तक यह प्रक्रिया परोक्ष थी, जिसमें पार्षद अध्यक्ष का चुनाव करते थे। नई व्यवस्था में मतदाता सीधे अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देकर अध्यक्ष चुनेंगे।
सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था जनता की भागीदारी बढ़ाती है और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करती है। इस बदलाव को कैबिनेट की मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी, जिसके बाद विधानसभा ने भी इसे पास कर दिया।
बहस के बीच पास हुआ संशोधन बिल, राइट टू रिकॉल की अवधि बढ़ाई
विधानसभा में नगर पालिका संशोधन विधेयक 2025 को आवाज़ बहुमत से पारित किया गया। बिल की बहस के दौरान राइट टू रिकॉल की अवधि ढाई साल से बढ़ाकर तीन साल करने के फैसले पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी तकरार हुई।
सरकार का तर्क था कि तीन साल का समय किसी भी अध्यक्ष के कामकाज का आकलन करने के लिए बेहतर होगा और यह स्थानीय निकायों को अधिक स्थिरता देगा। वहीं विपक्ष ने इस संशोधन को जनता के अधिकारों में कटौती बताया।
स्थानीय निकायों को अधिक अधिकार देने की दिशा में कदम
सरकार का कहना है कि यह विधेयक स्थानीय निकायों को मजबूत करेगा और सीधे जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ाएगा। मंत्री ने सदन में कहा कि यह सुधार स्थानीय शासन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इस बिल के लागू होने के बाद 2027 के निकाय चुनाव मध्य प्रदेश की राजनीति में नया अध्याय जोड़ेंगे।