झारखंड मॉडल की राह पर MP: अब टैबलेट से चलेगी कैबिनेट, 6 जनवरी से लागू होगा ई-कैबिनेट सिस्टम भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार अब प्रशासनिक कामकाज को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। ई-फाइल प्रणाली के बाद अब कैबिनेट बैठकें भी पेपरलेस होंगी। झारखंड मॉडल से प्रेरित इस नई व्यवस्था के तहत मंत्रियों को कागज़ी फाइलों की जगह टैबलेट पर कैबिनेट एजेंडा उपलब्ध कराया जाएगा। 6 जनवरी को होने वाली बैठक से यह प्रणाली औपचारिक रूप से लागू होगी।
झारखंड मॉडल पर आधारित ई-कैबिनेट व्यवस्था
मध्य प्रदेश में लागू होने जा रहा ई-कैबिनेट मॉडल झारखंड सरकार की सफल डिजिटल कैबिनेट प्रणाली से प्रेरित है। इस व्यवस्था के तहत कैबिनेट से जुड़े सभी प्रस्ताव, नोट्स और निर्णय एक विशेष एप्लीकेशन के माध्यम से उपलब्ध होंगे। इससे न केवल कागज़ की खपत कम होगी, बल्कि निर्णय प्रक्रिया भी अधिक तेज और पारदर्शी बनेगी।
मंत्रियों को मिलेगा S-11 टैबलेट
6 जनवरी की कैबिनेट बैठक में सभी मंत्रियों को विशेष S-11 टैबलेट प्रदान किए जाएंगे। इन टैबलेट्स के जरिए मंत्री बैठक से पहले ही पूरा एजेंडा, प्रस्ताव और जरूरी दस्तावेज देख सकेंगे। अब मंत्रियों के बंगलों पर कैबिनेट एजेंडा का भारी फोल्डर भेजने की प्रक्रिया पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।
आईएएस अधिकारियों को भी डिजिटल सुविधा
कैबिनेट बैठकों में स्थायी रूप से शामिल होने वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को भी टैबलेट दिए जाएंगे। इससे बैठक के दौरान किसी भी प्रस्ताव या दस्तावेज पर तुरंत डिजिटल एक्सेस संभव होगा। सरकार का मानना है कि इससे समय की बचत के साथ-साथ कार्यक्षमता में भी बढ़ोतरी होगी।
स्टाफ को दिया गया विशेष प्रशिक्षण
ई-कैबिनेट सिस्टम को सुचारु रूप से लागू करने के लिए मंत्रियों के निजी स्टाफ और संबंधित अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। उन्हें ई-कैबिनेट एप के संचालन, सुरक्षा और डेटा एक्सेस से जुड़ी जानकारी दी गई है, ताकि किसी भी तकनीकी बाधा से बचा जा सके।
फरवरी से पूरी तरह पेपरलेस कैबिनेट
सरकार की योजना है कि फरवरी महीने से कैबिनेट से संबंधित सभी सूचनाएं, दस्तावेज और निर्णय पूरी तरह डिजिटल फॉर्मेट में ही साझा किए जाएं। इससे प्रशासनिक खर्च में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
डिजिटल गवर्नेंस की ओर मजबूत कदम
ई-कैबिनेट मॉडल को मध्य प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है। यह पहल न केवल प्रशासनिक सुधार लाएगी, बल्कि राज्य को स्मार्ट और तकनीक-सक्षम शासन की ओर आगे बढ़ाएगी।