MP E-Bus Yojana: मध्य प्रदेश में अब पब्लिक ट्रांसपोर्ट और अधिक पर्यावरण अनुकूल होने जा रहा है। दिसंबर 2025 से प्रदेश के 6 बड़े शहरों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर और सागर—में इलेक्ट्रिक बसें दौड़ने लगेंगी। यह पहल न केवल प्रदूषण को कम करने में मदद करेगी, बल्कि यात्रियों को किफायती और आधुनिक परिवहन का विकल्प भी देगी। इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 582 ई-बसें चलाई जाएंगी और विशेष चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जा रहा है।
582 ई-बसें, 6 शहर और हर दिन 180 किमी की तय दूरी
इस परियोजना के तहत 582 इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी, जिनमें 472 मिडी बसें (26 सीटर) और 110 मिनी बसें (21 सीटर) शामिल होंगी। ये बसें प्रतिदिन कम से कम 180 किमी की दूरी तय करेंगी। इसके लिए केंद्र सरकार प्रति किलोमीटर ₹22 की सब्सिडी देगी, जबकि बाकी राशि राज्य सरकार वहन करेगी। ऑपरेटर कंपनी को ₹58.14 प्रति किमी के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।
10 नए डिपो और चार्जिंग स्टेशन की होगी व्यवस्था
राज्य में 10 बस डिपो बनाए जाएंगे। भोपाल में बैरागढ़ और कस्तूरबा नगर, इंदौर में नायता मुंडला और चंदन नगर, जबकि उज्जैन, सागर, जबलपुर और ग्वालियर में एक-एक डिपो स्थापित होंगे। बसों को चार्ज करने के लिए भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में दो-दो चार्जिंग स्टेशन तथा उज्जैन, जबलपुर और सागर में एक-एक स्टेशन तैयार किए जाएंगे।
टिकटिंग और रूट निर्धारण की जिम्मेदारी नगर निगम पर
इन ई-बसों के किराए और रूट का निर्धारण नगर निगम के तहत गठित एसपीवी कमेटी द्वारा किया जाएगा। कमेटी इसके लिए आरटीओ से सलाह लेगी। टिकटिंग के लिए एक विशेष एजेंसी की नियुक्ति भी नगर निगम द्वारा की जाएगी।
प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम
यह ई-बस परियोजना न केवल डीजल और पेट्रोल पर निर्भरता को कम करेगी, बल्कि वायु प्रदूषण को भी नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाएगी। शहरों में बेहतर और स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन का यह नया युग शुरू होने वाला है।
प्रोजेक्ट में भारी निवेश, हाई टेंशन लाइन भी होगी तैयार
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लगभग ₹60 करोड़ की लागत से 41 किमी लंबी हाई टेंशन लाइन बिछाई जाएगी। वहीं बस डिपो निर्माण पर ₹58 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इस पूरी योजना का क्रियान्वयन नगरीय विकास एवं आवास विभाग की निगरानी में होगा।
मध्य प्रदेश की ई-बस योजना, राज्य को प्रदूषण मुक्त और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट की दिशा में ले जाने वाला बड़ा कदम है। यह परियोजना न सिर्फ पर्यावरण हितैषी है, बल्कि आर्थिक रूप से भी लाभकारी सिद्ध होगी।