मध्य प्रदेश को जल्द ही ऊर्जा अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान मिलने वाली है। 13 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भोपाल स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान में 550 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमिपूजन करेंगे। इस हाईटेक रिसर्च पार्क में भविष्य की सस्ती और स्वच्छ बिजली तैयार करने की तकनीकों पर काम होगा, जिससे राज्य को ऊर्जा नवाचार का बड़ा केंद्र बनाने की तैयारी है।
550 करोड़ की लागत से बनेगा अत्याधुनिक केंद्र
भोपाल स्थित संस्थान परिसर में 52 एकड़ भूमि पर सोलर रिसर्च पार्क और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी सेंटर विकसित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार यह केवल एक बिजली उत्पादन परियोजना नहीं होगी, बल्कि नई पीढ़ी की क्लीन एनर्जी तकनीकों की प्रयोगशाला बनेगी। यहां शोधकर्ता ऊर्जा उत्पादन को अधिक कुशल और कम लागत वाला बनाने पर फोकस करेंगे, जिससे भविष्य में आम उपभोक्ताओं को भी सस्ती बिजली मिलने का रास्ता खुलेगा।
सूरज से हाइड्रोजन तक होगी ऊर्जा पर रिसर्च
इस केंद्र में सौर ऊर्जा के साथ-साथ पवन, जल और ग्रीन हाइड्रोजन से बिजली उत्पादन पर व्यापक अध्ययन किया जाएगा। वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि ऊर्जा संग्रहण कैसे बेहतर किया जाए, बादल या रात के समय भी बिजली की सप्लाई कैसे स्थिर रखी जाए और ट्रांसमिशन के दौरान होने वाले नुकसान को किस तरह कम किया जा सकता है। इसके लिए आधुनिक बैटरी सिस्टम, स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर प्रयोग होंगे।
एआई और क्वांटम तकनीकें भी होंगी शामिल
परियोजना के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऊर्जा प्रबंधन, क्वांटम सेमीकंडक्टर, एडवांस पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी शोध होगा। इन तकनीकों से बिजली उत्पादन और वितरण दोनों को ज्यादा स्मार्ट और प्रभावी बनाया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश को भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
छात्रों और युवाओं के लिए खुलेगा नया मंच
इस रिसर्च पार्क से छात्रों को क्लासरूम से बाहर निकलकर लाइव प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मिलेगा। हाईटेक प्रयोगशालाओं में इंडस्ट्री से जुड़े प्रयोग, पेटेंट रिसर्च और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इसके साथ ही संस्थान में रिन्यूएबल एनर्जी पर केंद्रित एमटेक पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं को सीधा लाभ होगा।
स्टार्टअप और निवेश को मिलेगी रफ्तार
ऊर्जा अनुसंधान के इस बड़े केंद्र के शुरू होने से स्टार्टअप संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा। नई तकनीकों के व्यावसायीकरण से निवेश आकर्षित होगा और राज्य में ग्रीन एनर्जी से जुड़े उद्योगों को मजबूती मिलेगी। सरकार को उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा नवाचार के हब के रूप में स्थापित करेगा।