भोपाल। मध्यप्रदेश में आपातकालीन 108 एम्बुलेंस सेवा अब मजाक का विषय बनती जा रही है। पिछले छह महीनों में करीब 5.72 लाख फर्जी कॉल्स आने से न सिर्फ कॉल सेंटर का स्टाफ परेशान है, बल्कि करीब 1500 घंटे की एम्बुलेंस सेवा भी व्यर्थ चली गई है। कई लोग “गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप”, “पेट्रोल खत्म हो गया” या “मज़े के लिए बात करनी थी” जैसी वजहों से फोन कर देते हैं, जिससे वास्तविक आपात स्थिति वाले मरीजों की जान पर बन आती है।
फर्जी कॉल से बिगड़ रही सेवा की विश्वसनीयता
राज्यभर में 108 सेवा जरूरतमंद मरीजों के लिए हर पल तैयार रहती है, लेकिन लगातार आ रहे फर्जी कॉल्स ने सिस्टम की विश्वसनीयता पर असर डाला है। कई बार कॉलर सिर्फ मनोरंजन या समय बिताने के लिए फोन करते हैं, जबकि उसी वक्त कोई असली मरीज अस्पताल पहुंचने के लिए जूझ रहा होता है। इस तरह की लापरवाही कई जिंदगियों के लिए जोखिम बन रही है।
बार-बार कॉल करने वालों पर नजर
एम्बुलेंस सेवा से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, कुछ लोग 150 से 200 बार तक फर्जी कॉल कर चुके हैं। कई कॉल्स महिला स्टाफ से बात करने या परेशान करने के उद्देश्य से किए जाते हैं। अब इन नंबरों को ट्रैक कर कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है ताकि सिस्टम का दुरुपयोग रोका जा सके।
जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रही मदद
जब फर्जी कॉल पर एम्बुलेंस भेजी जाती है, तब किसी असली मरीज को देर से मदद मिलती है। एक गलत कॉल किसी की जान ले सकती है। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ बढ़ा रही है और 108 सेवा के असली उद्देश्य को कमजोर कर रही है।
प्रशासन सख्त, होगी कार्रवाई
सरकार अब इन कॉलर्स के खिलाफ सख्त कदम उठाने जा रही है। कॉल डिटेल्स के आधार पर चेतावनी और फिर कानूनी एक्शन की प्रक्रिया शुरू होगी। अधिकारियों का कहना है कि जनता को समझना चाहिए कि 108 सेवा “आपात स्थिति” के लिए है, न कि मज़ाक या मनोरंजन के लिए।