मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग के भीतर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए उन लोगों पर शिकंजा कसा है जो फर्जी डीएड डिग्रियों के आधार पर सरकारी शिक्षक बन गए थे। जांच में यह खुलासा हुआ कि संगठित गैंग नकली अंकसूचियों के जरिए कई लोगों को शिक्षक की नौकरी दिलवा रही थी। एसटीएफ ने इस मामले में 8 शिक्षकों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है।
फर्जी डिग्री से बनी थी सरकारी नौकरी
राज्य में एसटीएफ को जानकारी मिली थी कि कुछ लोगों ने फर्जी डीएड डिग्रियां तैयार कर सरकारी शिक्षकों की नियुक्ति करवाई है। जांच के दौरान यह पाया गया कि इन शिक्षकों ने अपने दस्तावेजों में नकली अंकसूचियां प्रस्तुत की थीं और सत्यापन रिपोर्ट भी फर्जी तरीके से बनाई गई थी।
जांच में यह भी सामने आया कि यह कोई एक व्यक्ति का खेल नहीं बल्कि संगठित गिरोह का काम था, जो नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। इन फर्जी दस्तावेजों की मदद से कई लोग शिक्षा विभाग में शिक्षक बन बैठे।
एसटीएफ की जांच में सामने आए 8 नाम
एसटीएफ ने शुरुआती जांच के बाद आठ शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें शामिल हैं—
गंधर्व सिंह रावत
साहब सिंह कुशवाह
बृजेश रोरिया
महेन्द्र सिंह रावत
लोकेन्द्र सिंह
रूबी कुशवाह
रविन्द्र सिंह राणा
अर्जुन सिंह चौहान
ये सभी शिक्षक वर्तमान में मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी और इंदौर समेत विभिन्न जिलों में पदस्थ हैं।
26 और संदिग्धों पर जांच जारी
एसटीएफ ने बताया कि इस मामले में अभी 26 और लोगों की जांच चल रही है, जिन पर फर्जी दस्तावेजों से नियुक्ति पाने का संदेह है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह गैंग कहां से ऑपरेट कर रही थी और इसमें शिक्षा विभाग के कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं।
शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। विभाग अब सभी पुराने नियुक्तियों के दस्तावेजों की दोबारा जांच की तैयारी में है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी फर्जी शिक्षकों के नाम सामने आ सकते हैं।