फरवरी का महीना आमतौर पर हल्की गुलाबी ठंड और सुहाने मौसम के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर संभाग में दिन का पारा 30 से 34 डिग्री के बीच बना हुआ है। मौसम का यह बदला हुआ मिजाज लोगों को अप्रैल–मई की याद दिलाने लगा है।
30 से 35 डिग्री के पार पहुंचा तापमान
राज्य के करीब 30 जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया है। खंडवा और खरगोन में पारा 35.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
इंदौर में 33.1 डिग्री, उज्जैन में 33 डिग्री, ग्वालियर में 32.6 डिग्री, भोपाल में 32 डिग्री और जबलपुर में 31.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।
आमतौर पर इतनी गर्मी अप्रैल के महीने में पड़ती है, लेकिन इस बार फरवरी में ही यह स्थिति देखने को मिल रही है।
रात में भी बढ़ी गर्मी, न्यूनतम तापमान 17°C के पार
दिन ही नहीं, रात का तापमान भी सामान्य से ज्यादा दर्ज किया जा रहा है। धार में न्यूनतम तापमान 17.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। भोपाल में 15 डिग्री, इंदौर में 14.6 डिग्री, ग्वालियर और उज्जैन में 14.5 डिग्री और जबलपुर में 14.6 डिग्री दर्ज किया गया।
रतलाम, नरसिंहपुर, सागर, टीकमगढ़ और नर्मदापुरम में भी रात का पारा 16 डिग्री से ऊपर रहा। इससे ठंड का असर लगभग खत्म सा हो गया है।
क्या है फरवरी में अप्रैल जैसी गर्मी की वजह?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस असामान्य गर्मी की बड़ी वजह सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की कमी है। जब पश्चिमी विक्षोभ मजबूत नहीं होता, तो उत्तर भारत में ठंडी हवाएं और बारिश नहीं पहुंच पातीं।
साफ आसमान, नमी की कमी और बादलों की अनुपस्थिति के कारण सूरज की सीधी किरणें धरती को अधिक गर्म कर रही हैं। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग भी मौसम के पैटर्न को प्रभावित कर रहे हैं। यही कारण है कि फरवरी में ही अप्रैल जैसी गर्मी महसूस हो रही है।
2 मार्च से मिल सकती है राहत
मौसम विभाग के अनुसार 2 मार्च से एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसका असर पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों के साथ-साथ मध्य प्रदेश पर भी पड़ सकता है।
यदि यह सिस्टम प्रभावी रहा, तो तापमान में कुछ गिरावट दर्ज की जा सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि तब तक मौसम साफ रहने और तापमान सामान्य से अधिक बने रहने का अनुमान है।