मध्य प्रदेश में आग से जुड़ी बढ़ती घटनाओं और कमजोर नियमों को देखते हुए राज्य सरकार ने फायर एंड इमरजेंसी सर्विस एक्ट 2025 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इस नए कानून में इमारतों से लेकर शादी, धार्मिक और राजनीतिक आयोजनों तक के लिए सख्त फायर सेफ्टी मानक लागू किए जा रहे हैं। अब 15 मीटर से ऊंची इमारतें और बड़े आयोजन बिना फायर सर्टिफिकेट के शुरू ही नहीं हो पाएंगे। साथ ही पंडालों में अग्निरोधी कपड़ा और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य होंगे।
क्यों जरूरी पड़ा नया फायर सेफ्टी कानून?
अब तक राज्य में फायर सेफ्टी के नियम अलग-अलग संस्थानों में बंटे हुए थे, जिससे न तो जवाबदेही बन पाती थी और न ही सुरक्षा के सख्त प्रावधान लागू हो पाते थे। आधुनिक इमारतों, बड़े आयोजनों और बढ़ते हादसों के बीच पुराने नियम पर्याप्त साबित नहीं हो रहे थे। इसी वजह से पूरे राज्य के लिए एक एकीकृत, आधुनिक और सक्षम फायर सिस्टम की जरूरत महसूस हुई।
कैसे बदलेगी फायर सर्विस की संरचना?
नए एक्ट के तहत राज्य में कमिश्नर स्तर पर फायर एंड इमरजेंसी सर्विस का नेतृत्व होगा। साथ ही एक अनुभवी डायरेक्टर की नियुक्ति की जाएगी, जो कमिश्नर के अधीन काम करेगा। पुलिस थानों की तर्ज पर फायर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे और हर स्टेशन की सीमा तय होगी, ताकि आग लगने की घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।
इमारत मालिकों पर सख्ती, फायर सर्टिफिकेट अनिवार्य
15 मीटर से ऊंची इमारतों, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, होटल, मॉल, फैक्ट्री, गोदाम और 500 वर्ग मीटर से बड़े प्रतिष्ठानों को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट अनिवार्य रूप से लेना होगा। बिना इस सर्टिफिकेट के किसी भी बिल्डिंग को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा। साथ ही उपकरणों की मेंटेनेंस रिपोर्ट साल में दो बार जमा करनी होगी।
शादी, मेले और धार्मिक पंडालों के लिए कड़े नियम
अब पंडालों में लगने वाला कपड़ा फायर-रिटार्डेंट होना जरूरी होगा। आयोजकों को सुरक्षा के सभी प्रावधान पूरे किए जाने की लिखित घोषणा करनी होगी। फायर ऑफिसर किसी भी समय निरीक्षण कर सकते हैं और कमी मिलने पर पंडाल को तुरंत सील करने का अधिकार होगा। झूठी घोषणा पर आपराधिक कार्रवाई भी होगी।
फायर अधिकारियों को मिले अभूतपूर्व अधिकार
नए कानून में फायर अफसरों को इमारत सील करने, अतिक्रमण हटाने, जरूरत पड़ने पर संरचनाएं तोड़ने और बाधा डालने वालों को गिरफ्तार करने तक के अधिकार दिए गए हैं। आग बुझाने के लिए वे किसी भी निजी या सार्वजनिक स्रोत का पानी ले सकेंगे और इसमें बाधा डालने पर कड़ी सजा तय की गई है।