मध्य प्रदेश का पहला वातानुकूलित अंतरराज्यीय बस टर्मिनल यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं देने के उद्देश्य से तैयार किया गया था, लेकिन निर्माण पूरा होने के लंबे समय बाद भी यह शुरू नहीं हो सका है। करोड़ों की लागत से तैयार की गई इस परियोजना का संचालन अब तक शुरू नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। इमारत तैयार है, व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों के बीच समन्वय की कमी इसकी शुरुआत में बाधा बनती नजर आ रही है।
निर्माण पूरा, लेकिन संचालन अब भी अधर में
करीब 101 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस आधुनिक बस स्टैंड का निर्माण कार्य काफी समय पहले पूरा हो चुका था। इसे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया था। बस स्टैंड को आधिकारिक दर्जा मिलने के बाद उम्मीद थी कि जल्द ही यहां से बसों का संचालन शुरू होगा, लेकिन अभी तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।
ट्रेवल्स संचालकों की सहमति नहीं बन सकी
बस स्टैंड शुरू होने में सबसे बड़ी चुनौती ट्रेवल्स संचालकों की सहमति को माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार संचालक फिलहाल अपने पुराने स्थानों से ही बस संचालन जारी रखना चाहते हैं। इसे लेकर बैठक भी हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।
हरियाली की योजना भी होती दिख रही प्रभावित
बस स्टैंड परिसर को आकर्षक बनाने के लिए वहां पौधारोपण भी किया गया था। हालांकि रखरखाव की कमी के चलते लगाए गए कई पौधे सूखने लगे हैं। हाल के दिनों में इससे जुड़े वीडियो भी चर्चा का विषय बने रहे हैं।
जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग दावे
निर्माण एजेंसी का कहना है कि उसका कार्य पूरा हो चुका है और अब संचालन की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है। दूसरी ओर अधिकारियों का कहना है कि जल्द बैठक कर आगे की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
संचालन एजेंसी के साथ अनुबंध का इंतजार
बस स्टैंड संचालन के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है, लेकिन अब तक औपचारिक अनुबंध नहीं हो पाया है। ऐसे में यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं वाले इस बस स्टैंड के शुरू होने का इंतजार अभी जारी है।