मध्य प्रदेश टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। दिल्ली में मध्य प्रदेश सरकार और केंद्रीय दूरसंचार विभाग के बीच हुए समझौते के बाद ग्वालियर में देश का पहला इंटीग्रेटेड टेलीकॉम टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा। करीब 170 एकड़ क्षेत्र में बनने वाले इस प्रोजेक्ट में 5G, 6G और आधुनिक डिजिटल तकनीकों से जुड़े उपकरणों का निर्माण होगा। शुरुआती चरण में लगभग ₹2000 करोड़ के निवेश और 4500 प्रत्यक्ष रोजगार की योजना है, जबकि भविष्य में 8 से 9 हजार युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
डिजाइन से लेकर एक्सपोर्ट तक पूरी व्यवस्था एक ही स्थान पर
ग्वालियर में बनने वाला यह टेलीकॉम हब देश का पहला ऐसा केंद्र होगा, जहां किसी टेलीकॉम उत्पाद के डिजाइन, रिसर्च, डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और एक्सपोर्ट तक की पूरी प्रक्रिया एक ही परिसर में उपलब्ध होगी। इससे उद्योगों को अलग-अलग शहरों में तकनीकी परीक्षण या प्रमाणन के लिए जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। एकीकृत व्यवस्था होने से उत्पादन शुरू करने में लगने वाला समय कम होगा और कंपनियों की लागत में भी कमी आने की उम्मीद है। इससे मध्य प्रदेश हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा सकेगा।
प्लग एंड प्ले मॉडल से तेजी से शुरू होगा उत्पादन
इस परियोजना को प्लग एंड प्ले मॉडल पर विकसित किया जाएगा। यानी उद्योगों को फैक्ट्री स्थापित करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा पहले से तैयार मिलेगा। सड़क, बिजली, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होने से निवेशक कम समय में अपनी इकाइयों का संचालन शुरू कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि देश और विदेश की टेलीकॉम कंपनियां ग्वालियर को अपने उत्पादन केंद्र के रूप में चुनें और प्रदेश में औद्योगिक निवेश को नई गति मिले।
5G, 6G, IoT और सेमीकंडक्टर निर्माण पर रहेगा फोकस
प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में 5G और भविष्य की 6G तकनीक से जुड़े उपकरणों के साथ ऑप्टिकल फाइबर, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइस, नेटवर्किंग हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर आधारित उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। इन तकनीकों का उपयोग दूरसंचार के अलावा रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्मार्ट सिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी बढ़ रहा है। ऐसे में यह परियोजना प्रदेश को उभरती तकनीकों के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
केंद्र से मिलेगी आर्थिक सहायता, निवेशकों को मिलेंगी विशेष रियायतें
परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से करीब ₹500 करोड़ की वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव है, जबकि मध्य प्रदेश सरकार 170 एकड़ जमीन उपलब्ध कराएगी। निवेश आकर्षित करने के लिए स्टाम्प ड्यूटी में 100 प्रतिशत रिइम्बर्समेंट, पावर टैरिफ सपोर्ट और अन्य औद्योगिक प्रोत्साहन देने की योजना भी बनाई गई है। सरकार का मानना है कि इन सुविधाओं से बड़े निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और ग्वालियर आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख टेलीकॉम एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित होगा।