NAVRATRI GARBA CONTROVERSY: नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा आयोजनों में प्रवेश को लेकर मध्यप्रदेश में नया विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र में उठी मांग के बाद अब एमपी में भी कुछ हिंदू संगठनों और साधु-संतों ने गरबा आयोजनों में आने वालों के लिए तिलक और पूजन को अनिवार्य करने की बात कही है। संगठनों का कहना है कि धार्मिक आयोजन की मर्यादा बनाए रखने के लिए प्रवेश और आयोजन स्थल पर निगरानी जरूरी है। इस मुद्दे पर बैठक भी आयोजित की गई।
गरबा में आने वालों के तिलक की बात
बैठक में गरबा आयोजनों को लेकर कई फैसलों पर चर्चा हुई। हिंदूवादी संगठनों का कहना है कि जो लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते, उन्हें गरबा आयोजन में शामिल होने से बचना चाहिए। वहीं, मुस्लिम या अन्य गैर हिंदू समुदाय के लोगों के गरबा में आने की स्थिति में तिलक लगाने को अनिवार्य किए जाने की बात कही गई है। आयोजन के दौरान दुर्गा पूजन के साथ पंचद्रव्य से अभिषेक किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
पंडालों में औचक निरीक्षण की तैयारी
साधु-संतों की ओर से गरबा पंडालों में निगरानी बढ़ाने का निर्णय भी लिया गया है। इसके लिए औचक निरीक्षण किए जाने की बात कही गई है। संगठनों का कहना है कि आयोजन के दौरान किसी तरह की अश्लीलता या विवाद की स्थिति सामने आने पर पुलिस प्रशासन को सूचना दी जाएगी। उनका तर्क है कि नवरात्रि के धार्मिक आयोजनों की गरिमा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस तरह की निगरानी जरूरी है।
रामेश्वर शर्मा ने दिया बयान
इस मामले पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर किसी को हिंदू धर्म से लगाव है तो उसे राम, कृष्ण, महावीर और गौतम बुद्ध को अपने मन में बसाना चाहिए और सनातन धर्म को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने गरबा आयोजनों को लेकर कथित तौर पर ‘लव जिहाद’ की बात करते हुए कहा कि देश का युवा अपनी बहनों की सुरक्षा और माता-पिता की सेवा के लिए तैयार है। उन्होंने जगदंबा का आशीर्वाद लेकर राक्षसों के अंत की बात भी कही।
कांग्रेस ने विवाद से बचने की दी सलाह
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता अब्बास हाफिज ने कहा कि सभी लोगों को अपने-अपने आयोजनों में भाग लेना चाहिए और जहां विवाद की स्थिति बन सकती है, वहां जाने से बचना चाहिए। उन्होंने भाजपा और हिंदूवादी संगठनों पर धर्म के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया और रामेश्वर शर्मा के बयान को लेकर आपत्ति जताई। बैठक में महंत अनिलानंद महाराज और हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।