मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए मितव्ययिता (Austerity) की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कमजोर मानसून और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण प्रदेश की आय पर पड़ रहे संभावित असर को देखते हुए वित्त विभाग ने सरकारी खर्चों को नियंत्रित करने के निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत विदेश यात्राओं, होटलों में आयोजित बैठकों, अतिरिक्त सरकारी वाहनों और गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगाई गई है। साथ ही विभागों को संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने और खर्च में पारदर्शिता लाने के निर्देश दिए गए हैं।
विदेश यात्रा और होटल बैठकों पर सख्ती
वित्त विभाग के निर्देशों के अनुसार अब सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा केवल विशेष अनुमति मिलने के बाद ही की जा सकेगी। इसके अलावा होटल या निजी व्यावसायिक संस्थानों में कार्यशाला, प्रशिक्षण कार्यक्रम और बैठकों के आयोजन पर रोक लगा दी गई है। ऐसे कार्यक्रमों को सरकारी भवनों में आयोजित करने और जरूरत पड़ने पर वर्चुअल बैठक या वेबिनार को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
अफसरों के लिए लागू होगा व्हीकल शेयरिंग मॉडल
सरकार ने परिवहन खर्च कम करने के लिए व्हीकल शेयरिंग मॉडल लागू करने का फैसला लिया है। अब दो या तीन अधिकारी एक ही वाहन का उपयोग करेंगे। जिन अधिकारियों के पास अतिरिक्त विभागों का प्रभार है, उन्हें अलग से वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। विभागाध्यक्षों को किराए के वाहनों की संख्या सीमित करने और व्हीकल पूलिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
गैर-जरूरी खर्चों पर भी लगी रोक
मितव्ययिता के तहत सरकारी कैलेंडर और डायरी के मुद्रण, स्वागत समारोह, वीआईपी उपहार तथा कार्यालयों की गैर-जरूरी साज-सज्जा जैसे खर्चों पर भी रोक लगाई गई है। वहीं सरकारी खर्च पर हवाई यात्रा केवल इकोनॉमी क्लास में ही करने की अनुमति होगी। आवश्यक सेवाओं को छोड़कर नए वाहनों की खरीद भी सीमित कर दी गई है।
राजस्व अनुमान घटने के बाद लिया गया फैसला
सरकार का अनुमान है कि चालू वित्तीय वर्ष में प्रदेश की आय बजट अनुमान से करीब 10 हजार करोड़ रुपये तक कम रह सकती है। इसी को देखते हुए अतिरिक्त बजट का उपयोग मुख्य रूप से पूंजीगत कार्यों के लिए करने का निर्णय लिया गया है। नए कार्यों के लिए अतिरिक्त राशि केवल उन्हीं मामलों में दी जाएगी, जहां केंद्र सरकार या अन्य स्रोतों से मिलने वाली राशि में राज्यांश देना आवश्यक होगा।
CM पहले से अपना रहे मितव्ययिता का मॉडल
सरकार का कहना है कि खर्च में कटौती की पहल पहले से शुरू हो चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर चुके हैं और यात्रा के लिए इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग कर रहे हैं। साथ ही नई पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की जगह जरूरत पड़ने पर इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।