मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में नेशनल हाईवे पर टैक्स चोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। सीजीएसटी विभाग की टीम ने औबेदुल्लागंज के पास नेशनल हाईवे-46 पर 25 टन सुपारी से भरा एक ट्रक जब्त किया है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 70 लाख रुपये बताई जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रक चालक के पास माल से संबंधित कोई भी वैध बिल, ई-वे बिल या जीएसटी दस्तावेज मौजूद नहीं थे। इस कार्रवाई के बाद उत्तर भारत में सुपारी की अवैध सप्लाई और बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी की आशंका गहरा गई है।
खुफिया सूचना के आधार पर हाईवे पर रोका गया ट्रक
सीजीएसटी विभाग को पहले से खुफिया जानकारी मिली थी कि कर्नाटक से दिल्ली की ओर बिना टैक्स चुकाए सुपारी भेजी जा रही है। इसी इनपुट पर औबेदुल्लागंज क्षेत्र में गश्त के दौरान HR-38 AB 2404 नंबर के संदिग्ध ट्रक को रोका गया। जांच करने पर ट्रक में भारी मात्रा में सुपारी लदी पाई गई।जब चालक से दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई भी कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद ट्रक को तत्काल जब्त कर लिया गया और थाने में सुरक्षित खड़ा कराया गया।
कर्नाटक से दिल्ली जा रही थी सुपारी, टैक्स चोरी का शक
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह सुपारी कर्नाटक के चित्रदुर्ग क्षेत्र से लोड की गई थी और इसे दिल्ली के बाजारों में सप्लाई किया जाना था। अधिकारियों का मानना है कि बिना जीएसटी भुगतान के माल की यह खेप भेजी जा रही थी, जिससे सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता था। विभाग को शक है कि यह केवल एक ट्रक नहीं, बल्कि पूरे अवैध सप्लाई चेन का हिस्सा हो सकता है।
ड्राइवर से पूछताछ, मालिक की भूमिका भी जांच के घेरे में
ट्रक चालक से लगातार पूछताछ की जा रही है। साथ ही वाहन मालिक, माल भेजने वाले और रिसीवर की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई गई है। सीजीएसटी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इसके पीछे कोई बड़ा टैक्स चोरी रैकेट सक्रिय है।
यदि जांच में नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो आने वाले दिनों में और भी बड़ी कार्रवाई और गिरफ्तारियां संभव हैं।
अवैध माल परिवहन के खिलाफ अभियान जारी
फिलहाल जब्त सुपारी की सैंपलिंग और वैल्यूएशन की प्रक्रिया की जा रही है। विभागीय अधिकारियों ने साफ कहा है कि हाईवे पर टैक्स चोरी और अवैध माल परिवहन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। यह कार्रवाई एक बार फिर साबित करती है कि सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से बड़े आर्थिक अपराधों पर रोक लगाई जा सकती है।