मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की दवा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पहले फफूंद लगी दवा और अब माउथवॉश में कीड़े जैसी आकृति मिलने की शिकायत ने मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली की पोल खोल दी है। छिंदवाड़ा के कोल्ड सिरप कांड के बाद भी हालात नहीं सुधरे, जिससे लापरवाही के आरोप और गहरे हो गए हैं।
तीन दिन में दो शिकायतें, बढ़ी मरीजों की चिंता
जेपी जिला अस्पताल में महज तीन दिनों के भीतर दवाओं को लेकर दो अलग-अलग शिकायतें सामने आई हैं। पहली शिकायत एक दर्द निवारक दवा में फफूंद होने की थी, वहीं दूसरी शिकायत गले के संक्रमण के इलाज के लिए दिए गए माउथवॉश में कीड़े जैसी आकृति दिखने को लेकर दर्ज की गई। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने मरीजों के मन में डर और अविश्वास पैदा कर दिया है।
कौन-कौन सी दवाएं आईं संदेह के घेरे में
जिन दवाओं को लेकर सवाल उठे हैं, वे रोजमर्रा में बड़ी संख्या में मरीजों को दी जाती हैं। इनमें 50 एमजी की दर्द निवारक टैबलेट और 0.2 प्रतिशत क्लोरहेक्सिडिन युक्त 50 एमएल माउथवॉश शामिल है। माउथवॉश की बोतल में दिख रही संदिग्ध वस्तु को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वह वास्तव में क्या है।
जांच के आदेश, बनी विशेष टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने पांच सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया है। इस टीम को अस्पताल की फार्मेसी, ड्रग स्टोर और पूरे दवा स्टॉक की गुणवत्ता की जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच दल यह भी पड़ताल कर रहा है कि दवाओं के भंडारण में कहीं लापरवाही तो नहीं बरती जा रही।
नमी बनी बड़ी समस्या
अस्पताल के स्टोर से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि परिसर में लंबे समय से नमी और सीलन की समस्या बनी हुई है। दीवारों में सीलन के कारण दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इस समस्या को लेकर पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका।
प्रशासन की चुप्पी और बढ़ते सवाल
पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। जहां एक ओर जांच की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर अब तक किसी भी मामले की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। मरीजों का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक सरकारी अस्पतालों पर भरोसा करना मुश्किल होता जाएगा।