मध्य प्रदेश में शराब पीने वालों को आने वाले समय में बड़ा झटका लग सकता है। राज्य सरकार की प्रस्तावित आबकारी नीति 2026-27 में ऐसे कई बदलाव किए जाने की तैयारी है, जिनका सीधा असर खुदरा कीमतों पर पड़ेगा। टैक्स दरों में संशोधन, केंद्र से मिलने वाली हिस्सेदारी में कटौती और बढ़ते कर्ज को देखते हुए सरकार राजस्व बढ़ाने के विकल्प तलाश रही है।
तीन बड़े कारणों से बढ़ सकती हैं कीमतें
सरकार के अनुसार शराब महंगी होने के पीछे तीन मुख्य वजहें हैं। पहली, शराब की बिक्री पर स्रोत पर लगने वाले कर यानी TCS को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत किया गया है, जिससे 1300 रुपये की बोतल करीब 50 रुपये तक महंगी हो सकती है। दूसरी वजह केंद्र से मिलने वाले कर हिस्से में कटौती है, जो पहले 7.86 प्रतिशत था और अब घटकर 7.34 प्रतिशत रह गया है। तीसरा कारण राज्य सरकार पर बढ़ता कर्ज है, जो फिलहाल 62,300 करोड़ रुपये के आसपास बताया जा रहा है।
मोनोपॉली खत्म करने की तैयारी
नई नीति के तहत शराब दुकानदारों की एकाधिकार व्यवस्था को तोड़ने पर खास जोर दिया जा रहा है। कई जिलों में एमआरपी से ज्यादा दाम पर शराब बिकने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। प्रतिस्पर्धा न होने से ग्राहकों को महंगी शराब खरीदनी पड़ती थी, वहीं बिक्री घटने पर सरकार को भी राजस्व नुकसान उठाना पड़ता था। प्रस्तावित बदलावों से बाजार में बराबरी का माहौल बनाने की योजना है।
नीलामी और टैक्स कलेक्शन में बदलाव
आबकारी विभाग शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया और टैक्स वसूली के तरीके में भी सुधार की तैयारी कर रहा है। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से ठेकों के आवंटन में पारदर्शिता आएगी और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा। इससे राज्य के खजाने में स्थिर और बेहतर आय सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
पवित्र शहरों में सख्ती, नई दुकानें नहीं खुलेंगी
प्रस्तावित नीति में यह भी साफ किया गया है कि प्रदेश में नई शराब दुकानें खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उज्जैन, ओंकारेश्वर और मैहर जैसे धार्मिक स्थलों में शराब बिक्री पर पहले से लागू प्रतिबंध को और सख्ती से लागू किया जाएगा। सरकार सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए इन क्षेत्रों को पूरी तरह शराब मुक्त बनाए रखने के पक्ष में है।
पुराने कानून में संशोधन की तैयारी
राज्य में लागू 1915 के आबकारी अधिनियम में भी संशोधन का रास्ता साफ किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य कानून को वर्तमान हालात के मुताबिक बनाना, नियमों को स्पष्ट करना और राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाना है। अगर यह नीति लागू होती है तो आने वाले वित्तीय वर्ष में शराब की कीमतों और बिक्री प्रणाली—दोनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।