मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर से बड़े पैमाने पर कर्ज लेने जा रही है। इस बार सरकार 4000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर्ज लेने की योजना बना रही है। यह कर्ज तीन हिस्सों में लिया जाएगा, जिसमें दो हिस्से 1500 करोड़ रुपए के और एक हिस्सा 1000 करोड़ रुपए का शामिल है। सरकार का उद्देश्य इस राशि का उपयोग लाड़ली बहना योजना जैसी सामाजिक कल्याण योजनाओं और अन्य विकास परियोजनाओं का भुगतान करने में करना है।
4000 करोड़ रुपए का नया कर्ज
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने घोषणा की है कि वह इस वित्तीय वर्ष में कुल 4000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर्ज लेगी। यह कर्ज तीन हिस्सों में विभाजित होगा – दो बार 1500 करोड़ रुपए और एक बार 1000 करोड़ रुपए। इससे पहले सरकार ने बाजार से 4800 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है। इस नए कर्ज का उद्देश्य मुख्य रूप से सामाजिक कल्याण योजनाओं, जैसे लाड़ली बहना योजना का भुगतान सुनिश्चित करना है।
कर्ज का वर्तमान आंकड़ा
वित्त वर्ष 2025 में, मध्य प्रदेश सरकार ने अब तक कुल कर्ज राशि 31,900 करोड़ रुपए तक पहुंचा दी है। वर्तमान में राज्य सरकार पर कुल बकाया कर्ज 4,53,640.27 करोड़ रुपए हो जाएगा। मार्च 2025 की स्थिति के अनुसार, सरकार पर पहले से ही 4,21,740.27 करोड़ रुपए का कर्ज था। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि सरकार लगातार वित्तीय दबाव में है, लेकिन योजनाओं का लाभ जारी रखने का प्रयास कर रही है।
वित्तीय संतुलन पर ध्यान
सरकार का कहना है कि यह कर्ज सीमा (Loan Limit) के भीतर ही लिया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2023-24 में मध्य प्रदेश सरकार 12,487.78 करोड़ रुपए के राजस्व अधिशेष में थी। उस वर्ष राज्य की कुल आमदनी 2,34,026.05 करोड़ रुपए और खर्च 2,21,538.27 करोड़ रुपए था। इसका तात्पर्य यह है कि सरकार अपनी आमदनी के अनुरूप कर्ज का प्रबंधन कर रही है ताकि विकास कार्यों को प्रभावित न होने दिया जाए।
योजनाओं का भुगतान प्राथमिकता
मध्य प्रदेश सरकार के इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार सामाजिक कल्याण योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है। विशेषकर लाड़ली बहना योजना जैसी महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित योजनाएं अब भी जारी रहेंगी। साथ ही, अन्य बुनियादी ढांचे व विकास कार्य भी प्रभावित नहीं होंगे।