मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट के मंत्रियों के लिए एक नई और सख्त समीक्षा प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। संगठन स्तर पर होने वाली इस दो दिवसीय “क्लास” में मंत्रियों को अपने ढाई साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पेश करना होगा। हर मंत्री को केवल 15 मिनट का समय मिलेगा। इस प्रक्रिया को सरकार की कार्यकुशलता और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
मंत्रियों के लिए शुरू हुई ‘अग्नि परीक्षा’
मध्यप्रदेश में बीजेपी सरकार ने पहली बार मंत्रियों के प्रदर्शन की औपचारिक समीक्षा शुरू की है। इसे राजनीतिक गलियारों में “अग्नि परीक्षा” कहा जा रहा है, जिसमें यह तय किया जाएगा कि कौन मंत्री अपने काम के आधार पर आगे बढ़ेगा और किसे संगठनात्मक बदलाव का सामना करना पड़ सकता है।
ढाई साल का रिपोर्ट कार्ड होगा पेश
सभी मंत्रियों को अपने लगभग ढाई साल के कार्यकाल का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश करना होगा। इसमें योजनाओं के क्रियान्वयन, विभागीय उपलब्धियों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रगति का विवरण शामिल रहेगा। यह रिपोर्ट सरकार के प्रदर्शन मूल्यांकन का मुख्य आधार बनेगी।
सिर्फ 15 मिनट में देना होगा जवाब
हर मंत्री को अपने कार्य और उपलब्धियों को प्रस्तुत करने के लिए केवल 15 मिनट का समय दिया गया है। इस सीमित समय में मंत्रियों को अपने विभाग की प्रमुख उपलब्धियों और चुनौतियों को स्पष्ट रूप से रखना होगा। यह व्यवस्था उनके प्रदर्शन की सटीक और तेज समीक्षा सुनिश्चित करेगी।
संगठन और सरकार के शीर्ष नेता करेंगे समीक्षा
इस मूल्यांकन प्रक्रिया में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल होंगे। सभी नेता मंत्रियों के साथ वन-टू-वन चर्चा करेंगे और उनके कामकाज का आकलन करेंगे।
कैबिनेट विस्तार पर भी असर की संभावना
सूत्रों के अनुसार इस परफॉर्मेंस टेस्ट का सीधा असर आगामी कैबिनेट विस्तार पर पड़ सकता है। जिन मंत्रियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया जाएगा, उन्हें पद से हटाने या संगठन में बदलाव की संभावना भी बन सकती है। वहीं बेहतर प्रदर्शन करने वालों को और मजबूत जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
इस अनोखी प्रक्रिया ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। इसे सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पहली बार इस तरह की संगठनात्मक समीक्षा ने मंत्रियों के कामकाज को सीधे मूल्यांकन के दायरे में ला दिया है।