
Mp missing children: भोपाल मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पिछले चार सालों में प्रदेश से 59 हजार से अधिक बच्चे गायब हुए हैं। जिनमें से सबसे ज्यादा मामले राजधानी भोपाल और इंदौर से सामने आए हैं। हालांकि इनमें से लगभग 90 प्रतिशत बच्चों को खोज निकाला गया है, लेकिन 6 हजार से अधिक बच्चे अब भी लापता हैं। यह जानकारी सरकार ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी, जो प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
विधानसभा में उठाया था सवाल
विधानसभा में यह सवाल कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री सचिन यादव ने उठाया था। सरकार की ओर से दिए गए जवाब के अनुसार, 4 जुलाई 2021 से 4 जुलाई 2025 तक कुल 59,365 बच्चे लापता हुए। इनमें 48,274 लड़कियां और 11,091 लड़के शामिल हैं। यह आंकड़े बच्चों के गुमशुदा होने को लेकर प्रदेश की स्थिति को दर्शाते हैं और सुरक्षा तंत्र की पोल खोलते हैं।
भोपाल-इंदौर से सबसे ज्यादा बच्चे लापता
प्रदेश के दो बड़े शहरों से बच्चों के लापता होने के सर्वाधिक मामले सामने आए हैं। अकेले भोपाल से 2,980 बच्चे गायब हुए, जिनमें 1,804 लड़कियां और 1,174 लड़के शामिल हैं। वहीं इंदौर में यह संख्या और भी ज्यादा है। यहां कुल 4,574 बच्चे लापता हुए, जिनमें 3,560 लड़कियां और 1,014 लड़के हैं।
अब तक 90 फीसदी बच्चों को खोजा गया
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 53 हजार से अधिक बच्चों को पुलिस ने खोज निकाला है, जो कुल गुमशुदा बच्चों का करीब 90 फीसदी है। लेकिन अभी भी 6,035 बच्चों की तलाश जारी है। यह स्थिति न केवल पीड़ित परिवारों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी प्रश्नचिन्ह लगाती है।
विधायक ने जताई चिंता
सचिन यादव ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर बच्चों का गुम होना प्रशासन की गंभीर विफलता है। भोपाल और इंदौर जैसे बड़े और अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले शहरों से भी हजारों बच्चों के गायब होने की घटनाएं सामने आना बेहद चिंताजनक है।
क्या कहता है यह आंकड़ा?
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के लापता होने की घटनाओं के पीछे कई वजहें होती हैं – घरेलू कलह, मानव तस्करी, बालश्रम, या फिर अपराधी गिरोहों की भूमिका। लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए यह ज़रूरी है कि पुलिस और सामाजिक संस्थाएं मिलकर इस दिशा में गंभीर और ठोस प्रयास करें।