मध्य प्रदेश सरकार अपने विधायकों को एक बार फिर आर्थिक राहत देने की तैयारी में है। पांच साल बाद राज्य में विधायकों को गाड़ी और घर खरीदने के लिए मिलने वाले कर्ज पर ब्याज में छूट देने की योजना दोबारा शुरू की जा रही है। 15वीं विधानसभा के कार्यकाल में यह योजना लागू थी, लेकिन कोरोना काल में इसे स्थगित कर दिया गया था। अब 16वीं विधानसभा के विधायकों की मांग पर सरकार इस योजना को और बेहतर बनाकर पेश करने जा रही है। सरकार की तरफ से वाहन और आवास ऋण की अधिकतम सीमा भी बढ़ाई जा रही है। ब्याज अनुदान की नई शर्तों के तहत दो कैटेगरी बनाई गई हैं, जिससे योजना का लाभ आवश्यकता के अनुसार वितरित किया जा सकेगा। इस कदम से जहां विधायकों को राहत मिलेगी, वहीं सरकारी खजाने पर भी संतुलित बोझ पड़ेगा।
बढ़ेगी लोन लिमिट, ब्याज दर में राहत
नई योजना के तहत विधायकों को वाहन खरीदने के लिए 25 लाख रुपये और आवास के लिए 50 लाख रुपये तक का कर्ज मिलेगा। पहले यह सीमा क्रमशः 15 लाख और 25 लाख थी। अब अधिक राशि का लाभ तो मिलेगा, लेकिन ब्याज दर में कुछ बदलाव किया गया है।
दो श्रेणियों में बांटी जाएगी ब्याज छूट
वित्त विभाग के संशोधित प्रस्ताव के अनुसार यदि कोई विधायक वाहन के लिए 15 लाख और आवास के लिए 25 लाख रुपये से अधिक का कर्ज लेता है, तो उसे केवल 2% ब्याज अनुदान मिलेगा। शेष ब्याज उन्हें खुद चुकाना होगा। वहीं, यदि कोई विधायक इससे कम का कर्ज लेता है, तो उसे सिर्फ 4% ब्याज देना होगा और बाकी राशि सरकार वहन करेगी।
किसे
मिलेगा लाभ?
इस योजना का सबसे अधिक फायदा उन विधायकों को मिलेगा जो पहली बार चुने गए हैं या जो पिछली योजना से वंचित रह गए थे। इससे उन्हें अपने जीवन स्तर को बेहतर करने का अवसर मिलेगा और सरकारी खजाने पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ेगा।
अब कैबिनेट की मंजूरी बाकी
फिलहाल संसदीय कार्य विभाग के प्रस्ताव को वित्त विभाग ने संशोधन के साथ मंजूरी दे दी है। अब यह प्रस्ताव अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट के सामने रखा जाएगा, जहां इसे हरी झंडी मिलने की पूरी संभावना है।