बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार मध्यप्रदेश की सियासी मौजूदगी अहम रहने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भाजपा ने बिहार की 52 से अधिक सीटों पर प्रचार की जिम्मेदारी दी है। इनमें अधिकतर सीटें यादव और ओबीसी बाहुल हैं, जो राज्य की सत्ता का गणित तय करने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। सीएम मोहन यादव आगामी 15 दिनों तक बिहार में रैलियां, पदयात्राएं और नुक्कड़ सभाएं करेंगे, ताकि बिहारी मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित किया जा सके।
यादव वोट बैंक साधने की रणनीति
बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा अहम रहे हैं। भाजपा का मानना है कि यादव और अति पिछड़ा वर्ग का बड़ा वोट बैंक सत्ता का रास्ता तय करता है। इसी रणनीति के तहत मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव—जो स्वयं यादव समाज से आते हैं—को प्रचार की कमान सौंपी गई है। पार्टी उन्हें यादव बाहुल सीटों पर बड़े चेहरे के रूप में पेश करना चाहती है, ताकि समाज के मतदाताओं को सीधे संदेश मिल सके कि भाजपा उनके प्रतिनिधित्व को महत्व देती है।
शिवराज और सिंधिया भी मोर्चे पर
डॉ. यादव के साथ बिहार अभियान में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मैदान में उतरेंगे। शिवराज सिंह अपने जनता से जुड़ाव के लिए पहचाने जाते हैं, इसलिए उन्हें ऐसे इलाकों में भेजा जा रहा है, जहां मतदाताओं से सीधा संवाद जरूरी है। सिंधिया को पार्टी की रणनीतिक रैलियों में शामिल किया जाएगा, ताकि संगठन और जनसमर्थन को मजबूत किया जा सके।
एमपी के नेताओं की बड़ी तैनाती
बिहार चुनाव में मध्यप्रदेश के 1200 से अधिक नेता और कार्यकर्ता सक्रिय हैं। इनमें बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा को सौंपी गई है, जो पटना जोन की 8 लोकसभा और 42 विधानसभा सीटों का प्रबंधन देखेंगे। वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल व्यापारिक वर्ग के बीच पहुंचकर संपर्क अभियान चला रहे हैं। आने वाले दिनों में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा और कई वरिष्ठ मंत्री भी मैदान में उतरेंगे।