मध्य प्रदेश में मानसून ने तय समय से कुछ दिन देर से दस्तक दी, लेकिन तीन दिनों में ही 54 जिलों को भिगो दिया। प्रदेश में दो लो प्रेशर एरिया और तीन साइक्लोनिक सिस्टम सक्रिय हैं, जिससे अगले 4 दिन तक भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। आपको बता दें कि इस साल 2025 में मानसून ने 21 जून को एमपी में एंट्री ली, जबकि सामान्यत: यह 15 जून तक पहुंच जाता है। हालांकि, इस बार मानसून ने बेहद तेज़ी दिखाई और केवल तीन दिनों में प्रदेश के 54 जिलों को कवर कर लिया। सिर्फ भिंड जिला बचा है, जहां मानसून के पहुंचने की संभावना गुरुवार को जताई गई है।
राजधानी भोपाल समेत कई जिलों में बरसात
भोपाल में बुधवार सुबह हल्की बूंदाबांदी के साथ बादल छाए रहे। वहीं, रतलाम और अशोकनगर में तेज बारिश दर्ज की गई। ग्वालियर-चंबल संभाग के श्योपुर, मुरैना और गुना जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। यहां अगले 24 घंटे में 2.5 से 4 इंच तक बारिश हो सकती है।
सिस्टम सक्रिय, तेज बारिश के आसार
प्रदेश में इस समय दो लो प्रेशर एरिया और तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम सक्रिय हैं। इससे अगले 96 घंटे यानी चार दिन तक इंदौर, भोपाल, जबलपुर, उज्जैन, धार, मंदसौर और बड़वानी समेत कई जिलों में मूसलाधार बारिश की संभावना जताई गई है। कुछ स्थानों पर 8 इंच तक पानी गिर सकता है।
तापमान में गिरावट, गर्मी से राहत
तेज बारिश और आंधी के चलते प्रदेश में तापमान में औसतन 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। भोपाल का अधिकतम तापमान 33 डिग्री, इंदौर का 31.4 डिग्री, ग्वालियर का 35.5 डिग्री और जबलपुर का 37.4 डिग्री दर्ज किया गया। बारिश ने गर्मी से राहत दिलाई है।
मानसून का ट्रेंड और रिकॉर्ड
पिछले दस सालों में जून के महीने में कई बार टेम्परेचर 45 डिग्री पार पहुंचा, लेकिन हाल के पांच वर्षों में गर्मी का असर कम रहा है। साल 2020 में जून में सबसे अधिक 16 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई थी। वहीं, 23 जून 2003 को 24 घंटे में 5 इंच से ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड बना था।