मध्य प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बारिश की रफ्तार थोड़ी धीमी रहने के संकेत हैं, लेकिन 14 जुलाई से मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाली नई मौसम प्रणाली के प्रभाव से प्रदेश के पूर्वी जिलों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम में इस बदलाव को खरीफ फसलों के लिए अनुकूल माना जा रहा है, वहीं कुछ इलाकों में जलभराव और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा।
14 जुलाई से फिर सक्रिय होगा मानसून
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में फिलहाल मानसून सक्रिय है, लेकिन अगले 72 घंटे वर्षा की तीव्रता अपेक्षाकृत कम रह सकती है। इसके बाद बंगाल की खाड़ी में बनने वाली नई मौसम प्रणाली के प्रभाव से 14 जुलाई से बारिश का दौर दोबारा तेज होने के आसार हैं। मौसम की यह गतिविधि विशेष रूप से पूर्वी मध्य प्रदेश में अधिक असर दिखा सकती है।
पूर्वी जिलों में भारी बारिश की संभावना
नई प्रणाली का प्रभाव रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर, पन्ना, छतरपुर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, कटनी, डिंडोरी, मंडला, बालाघाट और जबलपुर सहित कई जिलों में देखने को मिल सकता है। इन क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में हाल की अच्छी बारिश के बाद वर्षा की तीव्रता कुछ कम रह सकती है।
बंगाल की खाड़ी में बन रहा नया सिस्टम
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 13 जुलाई के आसपास उत्तर बंगाल की खाड़ी के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है। अनुकूल परिस्थितियां बनने पर यह आगे चलकर निम्न दाब क्षेत्र में बदल सकता है। यही प्रणाली मध्य प्रदेश में मानसून को दोबारा मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
किसानों के लिए राहत, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत
बारिश का नया दौर सोयाबीन, धान, मक्का, उड़द और अन्य खरीफ फसलों के लिए लाभदायक माना जा रहा है। इससे जलाशयों, नदियों और भूजल स्तर में भी सुधार की उम्मीद है। हालांकि लगातार भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव, नदी-नालों के उफान और आकाशीय बिजली जैसी परिस्थितियां भी बन सकती हैं। ऐसे में किसानों और आम लोगों को मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।