MP News Morena British Era Coins---मध्य प्रदेश के मुरैना में ग्रीन फील्ड हाईवे के निर्माण के दौरान जमीन की खुदाई में ब्रिटिशकालीन चांदी के सिक्के मिलने से हलचल मच गई। डोंगरपुर लोधा गांव के पास मिले इन सिक्कों पर 1913 की तारीख और ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम का नाम दर्ज है। प्रशासन ने सिक्कों को सुरक्षित कराने के साथ ही पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
खुदाई के दौरान अचानक नजर आए पुराने सिक्के
ग्रीन फील्ड हाईवे के निर्माण के लिए डोंगरपुर लोधा गांव के पास खुदाई का काम चल रहा था। इसी दौरान स्थानीय ग्रामीणों और जेसीबी संचालक को जमीन से कुछ पुराने सिक्के दिखाई दिए। सिक्के मिलने की जानकारी सामने आते ही प्रशासन और पुलिस को इसकी सूचना दी गई। इसके बाद अधिकारियों ने मौके पर मिले सिक्कों को एकत्र कर सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।
सिक्कों पर दर्ज है जॉर्ज पंचम का नाम
बरामद सिक्कों पर अंग्रेजी में ‘GEORGE V KING EMPEROR’ और वर्ष 1913 लिखा हुआ है। सिक्के के दूसरे हिस्से पर ‘ONE RUPEE INDIA’ अंकित है। पुरातत्व विभाग के जिला अधिकारी अशोक शर्मा के मुताबिक, एक सिक्के का वजन करीब 11.6 ग्राम है और इसमें लगभग 91 प्रतिशत चांदी होने की जानकारी सामने आई है।
1911 से 1936 के बीच जारी होते थे ऐसे सिक्के
ये सिक्के ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम के शासनकाल से जुड़े हैं। जॉर्ज पंचम के समय 1911 से 1936 के बीच इस तरह के सिक्के जारी किए गए थे। इनका वजन करीब 11.66 ग्राम और व्यास लगभग 30.5 मिलीमीटर बताया जाता है। उस दौर के सिक्कों पर ब्रिटिश सम्राट की तस्वीर भी अंकित होती थी। सामान्य तौर पर इनकी ढलाई मुंबई और कोलकाता की टकसाल में होती थी।
पुलिस जुटा रही सिक्के, पुरातत्व विभाग करेगा जांच
एडीएम अश्वनी रावत ने पुलिस को खुदाई वाले स्थान से मिले सिक्कों को एकत्र कर सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। माता बसैया थाना पुलिस सिक्कों को जुटाने की कार्रवाई कर रही है। प्रशासन यह भी पता लगाने में जुटा है कि मौके से कुल कितने सिक्के बरामद हुए हैं। जांच पूरी होने के बाद इन्हें पुरातत्व विभाग को सौंपा जाएगा।
क्या है 1913 के सिक्के की खासियत?
1913 का एक रुपये का सिक्का ऐतिहासिक महत्व रखता है। इसके एक हिस्से पर सजावटी फूलों की माला में गुलाब, थीस्ल, शेमरॉक और कमल जैसी आकृतियां दिखाई देती हैं। हालांकि केवल पुराना होने से किसी सिक्के की कीमत तय नहीं होती। उसकी स्थिति, टकसाल का निशान, दुर्लभता और प्रामाणिकता की जांच के बाद ही उसका वास्तविक ऐतिहासिक या संग्रहणीय मूल्य तय किया जा सकता है।