मध्यप्रदेश का भिंड जिला केवल ऐतिहासिक धरोहरों और वीर गाथाओं के लिए नहीं, बल्कि अपनी चमत्कारी धार्मिक मान्यताओं के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां स्थित मोटे गणेश जी का मंदिर श्रद्धा और आस्था का केंद्र है, जहां भक्तों की मान्यता है कि अगर लगातार 5 बुधवार दूब चढ़ाई जाए, तो हर मनोकामना पूर्ण होती है — चाहे वह आर्थिक संकट हो, पारिवारिक समस्या हो या फिर स्वास्थ्य से जुड़ी कोई परेशानी।
मंदिर की ऐतिहासिकता और विशेषता
भिंड जिले के गौरी सरोवर के पास स्थित यह मंदिर सैकड़ों साल पुराना है। कहा जाता है कि इसका निर्माण 11वीं सदी में हिंदू राजा पृथ्वीराज चौहान ने करवाया था। यहां विराजमान गणेश जी की प्रतिमा 5 फीट ऊंची है, जो पूरे जिले की सबसे ऊंची गणपति प्रतिमा मानी जाती है।
दूब चढ़ाने की खास मान्यता
इस मंदिर की सबसे खास परंपरा है — दूब चढ़ाना। यहां हर बुधवार भक्त गणेश जी को दूब चढ़ाते हैं। मान्यता है कि यदि कोई श्रद्धालु लगातार 5 बुधवार दूब चढ़ाए, तो उसकी कोई भी इच्छा अधूरी नहीं रहती। साथ में लड्डू और मोदक का भोग लगाकर भक्त अपनी मनोकामनाएं प्रकट करते हैं।
हर वर्ग के लोग करते हैं दर्शन
इस मंदिर की मान्यता इतनी प्रबल है कि यहां बच्चे से लेकर बुज़ुर्ग तक बड़ी श्रद्धा से आते हैं। कोई परीक्षा में सफलता चाहता है, तो कोई नौकरी में तरक्की। किसी को व्यापार में लाभ चाहिए तो किसी को स्वास्थ्य लाभ। सभी को उम्मीद रहती है कि मोटे गणेश जी उनकी प्रार्थना ज़रूर सुनेंगे।
बुधवार को लगता है भक्तों का मेला
हर बुधवार को मंदिर परिसर में भक्तों का हुजूम देखने को मिलता है। दूर-दूर से लोग यहां आते हैं और दूब, लड्डू और मोदक लेकर भगवान गणेश के दर्शन करते हैं। महंतों के अनुसार, बप्पा की पूजा बिना दूब के अधूरी मानी जाती है।