मध्य प्रदेश के सीधी जिले का हर्रई गांव देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां बीते 40 वर्षों से एक भी बच्चे का जन्म नहीं हुआ है, जिससे गांव के खैरवार समाज के लोग गहरे संकट में हैं। हैरानी की बात यह है कि इस रहस्य को लोग देवी की नाराजगी से जोड़कर देख रहे हैं। मान्यता है कि गांव की देवी ‘अंगारा माता’ का क्रोध ही संतान न होने की वजह है। 4,000 से ज्यादा की आबादी वाला यह गांव घने जंगलों के बीच बसा है और सीधी जिले की सीमा पर स्थित है।
यहां कई परिवार ऐसे हैं जिन्हें बच्चे की चाह में गांव छोड़कर दूसरे स्थानों पर जाना पड़ा। प्रशासन अब भी किसी ठोस समाधान की तलाश में है, लेकिन वैज्ञानिक कारणों से ज़्यादा लोग आस्था और परंपरा में जवाब ढूंढ रहे हैं। गांववालों की मांग है कि देवी के मंदिर का निर्माण कराया जाए और पारंपरिक पूजा पद्धति जिसमें बंदूक से सलामी दी जाती थी, उसे फिर से बहाल किया जाए। लेकिन प्रशासन इसे अंधविश्वास मानता है।
हर्रई
गांव: जहां संतान के
लिए गांव छोड़ना पड़ता
है
सीधी जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर स्थित हर्रई गांव को स्थानीय लोग 'अभागा गांव' कहने लगे हैं। यहां खैरवार समाज के लोगों को बच्चों की प्राप्ति के लिए अपने ही गांव से पलायन करना पड़ता है। जैसे ही वे दूसरे गांवों में बसते हैं, वहां संतान सुख मिल जाता है। इसके बाद जब बच्चे बड़े हो जाते हैं, तो वे वापस अपने पैतृक गांव लौटते हैं।
देवी की नाराजगी है वजह?
गांव के बुजुर्ग छोटेलाल सिंह के अनुसार, गांव के पूर्वज छत्तीसगढ़ से एक देवी की मूर्ति लाए थे और उसे पीपल के पेड़ के नीचे स्थापित किया गया था। पहले हर साल पूजा के दौरान देवी को बंदूक से सलामी दी जाती थी, लेकिन जब सरकार ने ग्रामीणों की बंदूकें जब्त कर लीं, तो यह परंपरा टूट गई। तभी से माना जाता है कि देवी नाराज हैं और गांव में बच्चों का जन्म रुक गया है।
प्रशासन का दावा: कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं
हालांकि, सीधी कलेक्टर का मानना है कि बंदूक और बच्चों के जन्म में कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है। लेकिन वे यह भी कहते हैं कि ग्रामीणों की आस्था को देखते हुए मंदिर निर्माण या पारंपरिक पूजा की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि देवी को मनाने के लिए सरकारी स्तर पर पहल की जाए ताकि संतान का सुख गांव को वापस मिल सके।