MP New Districts: मध्य प्रदेश के नक्शे में बड़ा बदलाव हुआ है। राज्य के तीन नए जिलों—मऊगंज, मैहर और पांढुर्णा—को अब चुनाव आयोग से भी आधिकारिक मान्यता मिल गई है। ये जिले पहले से प्रशासनिक रूप से अस्तित्व में थे, लेकिन अब इन्हें निर्वाचन प्रक्रिया में भी स्वतंत्र जिला का दर्जा प्राप्त हो गया है। इससे प्रदेश में जिलों की कुल संख्या बढ़कर 55 हो गई है। जानिए कौन सा जिला किस संभाग से अलग होकर बना और अब इसमें क्या बदलाव हुए हैं।
अब 55 जिलों का बना नया नक्शा
चुनाव आयोग ने 2023 में बनाए गए तीन नए जिलों—मऊगंज, मैहर और पांढुर्णा—को अपनी अधिकृत सूची में शामिल कर लिया है। यह निर्णय निर्वाचन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और सुगठित बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब इन जिलों के कलेक्टरों को विधानसभा क्षेत्रों में अपीलीय अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।
मऊगंज जिला: रीवा संभाग से पांचवां जिला
मऊगंज को 15 अगस्त 2023 को नया जिला घोषित किया गया था। यह रीवा संभाग का हिस्सा है और इससे पहले रीवा जिले से अलग किया गया था। इसका कुल क्षेत्रफल 1866.66 वर्ग किमी है। यह मध्य प्रदेश का 53वां जिला है।
पांढुर्णा जिला: छिंदवाड़ा से हुआ अलग
पांढुर्णा जिला वर्ष 2023 में अस्तित्व में आया। यह जबलपुर संभाग का नौवां जिला बना और पहले यह छिंदवाड़ा जिले का हिस्सा था। इसका क्षेत्रफल 1522.22 वर्ग किमी है और यह प्रदेश का 54वां जिला बना।
मैहर जिला: सतना से अलग होकर बना नया जिला
मैहर को सतना जिले से अलग कर नया जिला बनाया गया। यह रीवा संभाग का छठा जिला है और इसका कुल क्षेत्रफल 2722.79 वर्ग किमी है। यह मध्य प्रदेश का 55वां जिला घोषित किया गया है।
अपीलीय अधिकारियों की भी हुई नियुक्ति
नए जिलों को निर्वाचन आयोग की मान्यता मिलने के साथ ही अब इनके लिए अपीलीय अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी गई है। मऊगंज के कलेक्टर को पांढुर्णा और सौंसर विधानसभा क्षेत्रों का अपीलीय अधिकारी बनाया गया है, जबकि मैहर जिला अधिकारी अमरपाटन और मैहर विधानसभा सीट के लिए यह भूमिका निभाएंगे।
प्रदेश की नई जिला सूची में यह बदलाव
मध्य प्रदेश में अब कुल 55 जिले हो गए हैं। इनमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर जैसे पुराने जिलों के साथ ही अब मऊगंज, मैहर और पांढुर्णा भी आधिकारिक तौर पर शामिल हो चुके हैं। यह बदलाव आगामी चुनावों की दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
चुनाव आयोग की मान्यता मिलने से मध्य प्रदेश के तीन नए जिलों को प्रशासनिक और निर्वाचन दोनों ही स्तरों पर सशक्त पहचान मिल गई है। यह न केवल स्थानीय विकास के लिए जरूरी कदम है, बल्कि मतदाताओं के लिए भी सुविधाजनक होगा।