खंडवा जिले के महादेवगढ़ में एक बार फिर से धर्म परिवर्तन का अनोखा मामला देखने को मिला, जब गुड़ी क्षेत्र की रहने वाली मुस्लिम युवती सानिया ने सनातन धर्म अपनाकर हिंदू युवक निखिल के साथ सात फेरे लिए। सनातन धर्म में पुनर्वापसी के बाद युवती का नाम ‘सती’ रखा गया। इस पूरे आयोजन के दौरान महादेवगढ़ संचालक अशोक पालीवाल, पंडितों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी रही। युवती की यह धर्म-वापसी और तत्पश्चात विवाह पूरे खंडवा जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां एक ओर एक वर्ग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आत्मिक निर्णय बता रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे प्रेम में डूबा पागलपन करार दे रहे हैं
बचपन से इस्लाम में पली-बढ़ी, पर सनातन की तरफ झुका मन
सानिया बचपन से इस्लाम धर्म का पालन कर रही थी, लेकिन पिछले कुछ समय से वह सनातन संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिकता की ओर आकर्षन महसूस कर रही थी। सनातन धर्म को समझने के लिए उसने एक अनोखी यात्रा और अध्ययन का रास्ता अपनाया। सानिया पिछले तीन महीने से बनारस में बाबा काशी विश्वनाथ की नगरी में रही, जहां उसने धार्मिक ग्रंथों और कर्मकांडों का अध्ययन किया। इसके बाद वह मथुरा-वृंदावन भी गई, जहाँ उसने रामायण पाठ के साथ-साथ कृष्ण-राधा के दिव्य प्रेम और उनके आदर्शों को गहराई से समझा। युवती का कहना है कि वह प्रेम को केवल आकर्षण नहीं, बल्कि त्याग, आस्था और उच्चतम मूल्यों में देखना चाहती थी। इसी कारण उसने यह जानने की कोशिश की कि राधा-कृष्ण का प्रेम क्यों अमर माना जाता है, और सनातन धर्म में प्रेम का वास्तविक स्वरूप क्या है।
प्रेम की परीक्षा और आत्मिक समझ के बाद लिया निर्णय
सानिया लंबे समय से खंडवा निवासी निखिल नामक युवक के सम्पर्क में थी, और दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे। लेकिन सानिया ने प्रेम को धर्म और जीवन मूल्यों की कसौटी पर परखना चाहा। उसके अनुसार उसने यह जानने की कोशिश की कि प्रेम केवल शारीरिक आकर्षण है, या दो आत्माओं का मिलन?
धार्मिक अध्ययन पूरा करने और आत्मिक शांति पाने के बाद सानिया ने महादेवगढ़ पहुँचकर संचालक अशोक पालीवाल को अपनी पूरी कहानी सुनाई और सनातन धर्म अपनाने का निर्णय दोहराया। पालीवाल ने तत्काल पंडित बुलाकर विधिवत कर्मकांड कराया। यजमान विधि, पवित्र मंत्रोच्चार और हवन के साथ सानिया का ‘घर वापसी’ संस्कार पूरा किया गया, और उसका नया नाम ‘सती’ रखा गया।