MP News : मध्य प्रदेश की राजनीति इस समय मंत्री विजय शाह के विवादित बयान के कारण बुरी तरह से उथल-पुथल में है. सेना की पहली मुस्लिम महिला कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए बयान के बाद भाजपा को तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. विपक्ष लगातार इस्तीफे की मांग कर रहा है, लेकिन पार्टी और सरकार अभी तक कोई स्पष्ट निर्णय लेने से बच रही है.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले को कोर्ट के निर्णय पर छोड़ते हुए फिलहाल कोई कड़ा कदम नहीं उठाया है. इस बयान के बाद भाजपा के भीतर भी दरार दिखने लगी है, जहां एक वर्ग इस्तीफे की मांग कर रहा है तो दूसरा डैमेज कंट्रोल में लगा है. आदिवासी नेता होने के नाते शाह के इस्तीफे को लेकर पार्टी असमंजस में है, जिससे आदिवासी वोट बैंक पर असर पड़ सकता है. कांग्रेस इस मुद्दे पर पूरी आक्रामकता के साथ सरकार को घेरने में जुटी है. सुप्रीम कोर्ट तक में पार्टी ने कैविएट दायर कर दी है.
शाह का भविष्य कोर्ट और पार्टी पर निर्भर
विजय शाह के बयान ने भाजपा को सियासी संकट में डाल दिया है. मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि सरकार अदालत के आदेश के अनुसार ही अगला कदम उठाएगी. इससे स्पष्ट है कि पार्टी अभी फैसला टाल रही है. सूत्रों के अनुसार शाह ने इस्तीफा देने से मना कर दिया है, जिससे संकट और गहरा गया है.
पार्टी में दो धड़ों की स्थिति
भाजपा के भीतर इस मसले पर दो गुट बन गए हैं. एक धड़ा शाह के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा राजनीतिक नुकसान को देखते हुए मामले को टालने की रणनीति अपना रहा है. उमा भारती जैसे वरिष्ठ नेता भी बर्खास्तगी की बात कह चुके हैं.
आदिवासी वोटबैंक का गणित
विजय शाह आदिवासी समुदाय से आते हैं और पार्टी की जमीनी पकड़ इस वर्ग में मजबूत है. राज्य की 22% आबादी आदिवासी है, और 47 विधानसभा व 6 लोकसभा सीटें इसी वर्ग के लिए आरक्षित हैं. ऐसे में पार्टी को डर है कि सख्त कार्रवाई से आदिवासी समाज में नाराजगी फैल सकती है.
कांग्रेस की आक्रामक रणनीति
कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर पूरी ताकत से मैदान में है. सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल करने के साथ-साथ लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं. पार्टी इसे आदिवासी सम्मान और महिला सम्मान से जोड़कर जनता के बीच ले जा रही है.