मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं के बीच सहमति बन गई है कि ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। इस अहम फैसले से जुड़े पक्षकार अब सुप्रीम कोर्ट में एकजुट होकर अपना पक्ष रखेंगे। 23 सितंबर से सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई को लेकर दोनों पक्ष तैयारी में जुट गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संदेश भी इस दिशा में निर्णायक साबित हो रहा है।
मध्य प्रदेश सरकार का ओबीसी वर्ग के साथ मजबूती से समर्थन
भोपाल में संपन्न हुई महत्वपूर्ण बैठक में एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संदेश रखते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ओबीसी वर्ग के हित में पूरी तरह से खड़ी है। बैठक में सभी पक्षकार एकमत हुए कि ओबीसी वर्ग को पूर्ण 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाए। प्रशांत सिंह ने कहा कि यह पक्ष सुप्रीम कोर्ट में भी मजबूती से रखा जाएगा ताकि आरक्षण के लाभ सभी पात्र ओबीसी वर्ग तक पहुंचे।
याचिकाकर्ताओं और सरकार के वकील मिलकर रखेंगे पक्ष
बैठक में यह तय हुआ कि 23 सितंबर से शुरू हो रही सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में सरकार और याचिकाकर्ताओं के वकील मिलकर ओबीसी आरक्षण के पक्ष में दलील देंगे। याचिकाकर्ता लोकेंद्र गुर्जर और रामगोपाल लोधी ने बताया कि ओबीसी महासभा की ओर से दो वकीलों के नाम सरकार को देने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसमें से एक नाम भारत के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पी विल्सन का दिया जा चुका है। दूसरा नाम भी सुनवाई से पहले सरकार को सौंप दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री से ओबीसी महासभा प्रतिनिधियों की मुलाकात
इस निर्णय को और मजबूती देने के लिए शाम को ओबीसी महासभा के प्रतिनिधि और याचिका दाखिल करने वाले उम्मीदवारों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार ओबीसी वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में हर संभव कदम उठाएगी। यह मुलाकात ओबीसी वर्ग के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देखी जा रही है।
अब सुप्रीम कोर्ट में होगी निर्णायक सुनवाई
23 सितंबर से सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण को लेकर सुनवाई शुरू होगी। इस सुनवाई में सरकार के वकील और याचिकाकर्ता के वकील मिलकर पक्ष प्रस्तुत करेंगे। दोनों पक्षों की सहमति से यह मामला एक सकारात्मक दिशा में बढ़ रहा है। इस प्रयास से मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकार दिलाने की उम्मीद और मजबूत हो गई है।