मध्य प्रदेश में तबादलों की प्रक्रिया के बीच श्योपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक ऐसा पटवारी जिसका नाम भ्रष्टाचार के मामले में जेल में दर्ज है, उसका भी तबादला कर दिया गया। यही नहीं, जब इस पर सवाल उठे तो विभागीय मंत्री ने खुद मुख्यमंत्री के सामने प्रमुख सचिव (PS) पर मनमानी के आरोप लगाए। यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक प्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि ट्रांसफर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह है।
ट्रांसफर लिस्ट में शामिल था जेल में बंद पटवारी
16 जून को श्योपुर जिला प्रशासन ने पटवारियों के तबादलों की दो सूचियां जारी कीं। पहली सूची में 9 और दूसरी में 12 पटवारी शामिल थे। विजयपुर तहसील के पटवारी हेमंत मित्तल, जो धोखाधड़ी के मामले में जेल में बंद हैं, उनका नाम भी ट्रांसफर लिस्ट में पाया गया। उनका स्थानांतरण विजयपुर से बड़ौदा तहसील में किया गया।
मंत्री की नाराजगी, कैबिनेट में जताई शिकायत
ट्रांसफर के बाद जब विवाद बढ़ा, तो यह बात सामने आई कि इस ट्रांसफर की सिफारिश खुद राजस्व विभाग के मंत्री ने की थी। लेकिन कैबिनेट बैठक में उन्होंने सीएम के सामने स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई सिफारिश नहीं की। मंत्री ने आरोप लगाया कि प्रमुख सचिव उनकी बात नहीं मान रहे और मनमाने ढंग से ट्रांसफर कर रहे हैं।
विपक्ष का हमला, कांग्रेस ने साधा निशाना
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस नेता अरुण यादव ने सरकार को घेरते हुए ट्वीट किया – "जेल में बंद पटवारी का तबादला! डबल इंजन सरकार में ट्रांसफर उद्योग भी डबल स्पीड से चल रहा है।" उनका इशारा इस ओर था कि ट्रांसफर सिर्फ प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक राजनीतिक खेल बन गया है।
पुलिस और प्रशासन का बचाव
बड़ौदा थाना प्रभारी TI सत्यम सिंह गुर्जर ने बताया कि हेमंत मित्तल बाढ़ राहत राशि घोटाले में आरोपी हैं और धारा 420 सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज है। उन्हें कोर्ट ने जेल भेजा है। वहीं भू-अभिलेख अधीक्षक मुन्ना सिंह गुर्जर का कहना है कि संभवतः ट्रांसफर आदेश गिरफ्तारी से पहले अप्रूव हुए होंगे, इसलिए नाम सूची में आ गया। अब जेल में होने के कारण उनका नाम स्वाभाविक रूप से अमान्य हो जाएगा।
सवाल जो अब भी अनुत्तरित हैं...
क्या ट्रांसफर लिस्ट जारी करने से पहले सत्यापन नहीं किया गया?
अगर गिरफ्तारी की जानकारी थी, तो नाम क्यों शामिल हुआ?
क्या यह सामान्य प्रशासनिक भूल है या सुनियोजित लापरवाही?