Madhya Pradesh Trump Tariff Impact ---अमेरिका की ओर से भारतीय जेनेरिक दवाओं पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद मध्य प्रदेश का फार्मा सेक्टर नई रणनीति बनाने में जुट गया है। हालांकि यह व्यवस्था अगस्त 2028 से चरणबद्ध तरीके से लागू होनी है, लेकिन प्रदेश के दवा उद्योग ने अभी से नए वैश्विक बाजारों की तलाश शुरू कर दी है। उद्योग जगत का मानना है कि चुनौती के साथ नए अवसर भी पैदा होंगे।
अमेरिका के टैरिफ से MP फार्मा सेक्टर में हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से आयातित जेनेरिक दवाओं पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद दुनियाभर के फार्मा कारोबार में हलचल बढ़ गई है। इसका असर मध्य प्रदेश के दवा उद्योग पर भी देखने को मिल रहा है। हालांकि टैरिफ व्यवस्था तुरंत लागू नहीं होगी और इसे अगस्त 2028 से चरणबद्ध तरीके से लागू करने की बात कही गई है, लेकिन प्रदेश के फार्मा उद्यमियों ने भविष्य की तैयारी शुरू कर दी है। उद्योग जगत का कहना है कि अगर अमेरिका भारतीय दवाओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाता है तो इसका असर केवल भारतीय कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिकी मरीजों और वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में मध्य प्रदेश की फार्मा कंपनियां अब अपने निर्यात बाजारों को और मजबूत करने की योजना बना रही हैं।
पीथमपुर से भोपाल तक फैला MP का फार्मा नेटवर्क
मध्य प्रदेश में फार्मा उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। प्रदेश के पीथमपुर, इंदौर, देवास, मालनपुर, भोपाल और जबलपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों से हर साल बड़ी मात्रा में जेनेरिक दवाओं का निर्यात किया जाता है। प्रदेश में करीब 350 छोटी-बड़ी फार्मा इकाइयां संचालित हैं, जिनमें लगभग 100 कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। इन कंपनियों की दवाओं की मांग अमेरिका समेत कई देशों में बनी हुई है।
MP की जेनेरिक दवाओं पर दुनिया का भरोसा
मध्य प्रदेश से पैरासिटामोल, मेटफॉर्मिन, एमोक्सिसिलिन, एजीथ्रोमाइसिन, ओमेप्राजोल, एटोरवास्टेटिन और इबुप्रोफेन जैसी कई जरूरी जेनेरिक दवाओं का निर्यात किया जाता है। इसके अलावा वैक्सीन उत्पादन में भी प्रदेश की कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अमेरिका के अलावा कनाडा, ब्राजील, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, रूस, यूएई, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, वियतनाम, थाईलैंड, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में मध्य प्रदेश की दवाओं की पहुंच बनी हुई है।
उद्योगों का दावा- टैरिफ से ज्यादा प्रभावित होगा अमेरिका
बेसिक ड्रग डीलर एसोसिएशन मध्य प्रदेश के अध्यक्ष जेपी मूलचंदानी का कहना है कि भारतीय दवाओं ने गुणवत्ता और कम कीमत के कारण पूरी दुनिया में भरोसा बनाया है। अमेरिका में भी जेनेरिक दवाओं की बड़ी हिस्सेदारी भारतीय कंपनियों की है। उनका कहना है कि अगर टैरिफ लागू होता है तो निर्यातक दूसरे देशों में कारोबार बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। वहीं एमपी फेडरेशन ऑफ फार्मा इंटरप्रेन्योर के स्टेट चेयरमैन हिमांशु शाह ने कहा कि यह फैसला अमेरिका के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि दवाओं की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है।
संकट नहीं, नए बाजारों का अवसर देख रहा MP
पीथमपुर औद्योगिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी का कहना है कि उद्योग पहले भी कई वैश्विक चुनौतियों का सामना कर चुका है। अगर अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है तो मध्य प्रदेश की कंपनियां एशिया, अफ्रीका, यूरोप और पश्चिम एशिया जैसे बाजारों में निर्यात बढ़ाने पर ध्यान देंगी।
उनका मानना है कि भारतीय दवाओं की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमतें नए देशों में भी बड़ा अवसर पैदा कर सकती हैं। उद्योग अब अमेरिका पर निर्भरता कम कर नए बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।
फैक्ट फाइल
मध्य प्रदेश में 350 से ज्यादा फार्मा इकाइयां संचालित
करीब 100 कंपनियां अंतरराष्ट्रीय निर्यात से जुड़ी
पीथमपुर, इंदौर, देवास, मालनपुर, भोपाल और जबलपुर से दवा निर्यात
30 से ज्यादा देशों में पहुंच रही MP की जेनेरिक दवाएं