मध्य प्रदेश पुलिस विभाग ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल कर डाला है। केवल पांच दिनों के भीतर 10,482 पुलिसकर्मियों का तबादला कर एक नया रिकॉर्ड बना दिया गया है। यह ट्रांसफर सिर्फ संख्या में नहीं, बल्कि पारदर्शिता, निष्पक्षता और प्रभावी पुलिसिंग की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। सिपाही से लेकर सब-इंस्पेक्टर तक के अधिकारियों को नई तैनाती दी गई है। पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाना की निगरानी में यह ऐतिहासिक कार्रवाई संपन्न हुई, जिसकी शुरुआत 11 जून को पुलिस मुख्यालय से जारी निर्देशों के साथ हुई थी।
पहली बार इतने बड़े पैमाने पर फेरबदल
पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, प्रदेश के सभी 1100 थानों में कार्यरत उन पुलिसकर्मियों को हटाया गया जो पिछले 4 साल या उससे अधिक समय से एक ही स्थान पर तैनात थे। ट्रांसफर सूची में 15 सूबेदार, 196 सब इंस्पेक्टर (SI), 1083 असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (ASI), 3622 हेड कांस्टेबल और 5566 कांस्टेबल शामिल हैं।
सबसे ज्यादा तबादले इंदौर में
एमपी के 57 पुलिस जिलों में सबसे अधिक तबादले इंदौर कमिश्नरेट में हुए हैं, जहां 1029 पुलिसकर्मियों को इधर से उधर किया गया। इसके बाद ग्वालियर में 828, भोपाल में 699 और जबलपुर में 535 तबादले दर्ज किए गए।
क्या बोले DGP मकवाना
डीजीपी कैलाश मकवाना ने स्पष्ट किया कि यह कदम पुलिसिंग की गुणवत्ता सुधारने, राजनीतिक दखल को कम करने और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता से संचालित की गई है और इसकी कड़ी मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि सभी ट्रांसफर निष्पक्ष रूप से प्रभावी हो सकें।
जिलों में सख्त निगरानी
पुलिस मुख्यालय के प्रशासन शाखा के स्पेशल डीजी आदर्श कटियार के नेतृत्व में यह प्रक्रिया नियंत्रित हुई। आदेश जारी होते ही सभी एसपी को तत्काल प्रभाव से सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। हर जिले में इन ट्रांसफरों के पालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
क्यों जरूरी था ये ट्रांसफर
लंबे समय से जमे अफसरों पर प्रभाव या स्थानीय दबाव की आशंका
जनता और विभागीय शिकायतों को देखते हुए निष्पक्ष कार्रवाई
पुलिसिंग में ताजगी और जवाबदेही के लिए नई पोस्टिंग जरूरी