मध्य प्रदेश में पुलिसिंग को पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू हुई है। अब आम जनता थानों में लगाए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर सीधे पुलिस सेवा पर अपनी राय दे सकेगी। इस तकनीकी novelties की शुरुआत इंदौर से की गई है, जो आगे प्रदेशभर में लागू की जाएगी।
थानों में लगेगा फीडबैक क्यूआर कोड
जनसंपर्क और पुलिस सेवा की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए राज्य पुलिस ने एक नई व्यवस्था लागू की है। अब प्रदेश के हर थाने में एक क्यूआर कोड लगाया जाएगा, जिसे स्कैन कर नागरिक पुलिसकर्मियों के व्यवहार, समस्या समाधान की गति और अपने अनुभवों पर फीडबैक दे सकेंगे। यह राय सीधे उच्च अधिकारियों के मॉनिटरिंग सेल तक पहुंचेगी, जिससे समय पर सुधारात्मक कार्रवाई संभव हो सकेगी।
डीजीपी ने की शुरुआत, इंदौर से हुआ शुभारंभ
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने इस नई व्यवस्था का इंदौर के पलासिया स्थित कंट्रोल रूम में लोकार्पण किया। उन्होंने बताया कि इस योजना का उद्देश्य थाने में आने वाले प्रत्येक नागरिक को सुना जाना और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। QR कोड फीडबैक सिस्टम से पुलिस और जनता के बीच संवाद मजबूत होगा।
बेहतरीन काम पर मिला ISO सर्टिफिकेट
इस अवसर पर तेजाजी नगर और राजेंद्र नगर थानों को बेहतर पुलिसिंग और संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए ISO प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। साथ ही, सेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी और कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र भी दिए गए।
जनभागीदारी से पुलिसिंग में बदलाव
इस व्यवस्था से पुलिस तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी। लोग न केवल अपनी शिकायतें दर्ज कर सकेंगे, बल्कि यह भी बता सकेंगे कि उन्हें समाधान मिला या नहीं। आने वाले समय में यह प्रणाली पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी, जिससे पुलिस का जनविश्वास और भी मज़बूत होगा।