
मध्यप्रदेश में पुलिस भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। करीब 17 साल बाद पुलिस विभाग अब खुद सिपाही और सब-इंस्पेक्टर की भर्ती करवाएगा। शासन से मंजूरी मिलते ही इसका रास्ता साफ हो जाएगा। लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में धांधली और सॉल्वर गैंग के खुलासे के बाद यह कदम उठाया गया है। नया बोर्ड पुलिस मुख्यालय से अलग दफ्तर से संचालित होगा और इसकी रूपरेखा सात राज्यों के भर्ती बोर्ड का अध्ययन करने के बाद तैयार की गई है।
क्यों पड़ा भर्ती बोर्ड बनाने का फैसला?
हाल ही में आरक्षक भर्ती परीक्षा-2023 में सॉल्वर गैंग की गड़बड़ी सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने अपना भर्ती बोर्ड बनाने की तैयारी शुरू की। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद पुलिस मुख्यालय ने बोर्ड का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया। मंजूरी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
ऐसा होगा नए बोर्ड का ढांचा
नए भर्ती बोर्ड में स्पेशल डीजी/एडीजी चेयरमैन होंगे। इनके साथ आईजी, डीआईजी, एआईजी और डीजीपी द्वारा नामांकित दो अफसर शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा वित्त और लीगल सेल के नए पद भी सृजित होंगे। बोर्ड के गठन से पूरी भर्ती प्रक्रिया पुलिस के अधीन आ जाएगी।
7 राज्यों से सीखा अनुभव
नया प्रस्ताव बनाने से पहले पुलिस विभाग ने तमिलनाडु, केरल, यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात और तेलंगाना के भर्ती बोर्डों का अध्ययन किया। इन्हीं अनुभवों को आधार बनाकर मध्यप्रदेश के लिए नया ढांचा तैयार किया गया है।
नया दफ्तर और स्टाफ
भर्ती बोर्ड के लिए भदभदा रोड पर नया दफ्तर बनाया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय से अलग इस दफ्तर में बड़ी संख्या में स्टाफ और तकनीकी सुविधाएं होंगी।
कितने पदों पर भर्ती?
प्रदेश में करीब 25 हजार पद खाली हैं। हाल ही में 7500 सिपाहियों की भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इनमें आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इसके अलावा 500-500 पद सब-इंस्पेक्टर, सूबेदार और ऑफिस स्टाफ के लिए भी स्वीकृत किए गए हैं।
अब तक कैसे होती थी भर्ती?
साल 2009 तक पुलिस विभाग खुद लिखित और शारीरिक परीक्षा करवाता था। लेकिन बाद में सवाल उठने पर लिखित परीक्षा की जिम्मेदारी दूसरे बोर्ड को दे दी गई थी। हालांकि शारीरिक परीक्षा अब भी पुलिस ही कराती थी।