मध्य प्रदेश पुलिस ने अपने ट्रेनिंग सेंटर्स में नवआरक्षकों के चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए एक नई पहल शुरू की है। अब प्रशिक्षुओं को ‘रामचरितमानस’ के बाद ‘भगवद्गीता’ का भी पाठ कराया जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए सभी आठ ट्रेनिंग सेंटर्स को निर्देश भेजे हैं। अधिकारियों का मानना है कि गीता का अध्ययन पुलिस कर्मियों में अनुशासन, नैतिकता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देगा।
गीता से मिलेगी जीवन जीने की प्रेरणा
एडीजी (प्रशिक्षण) राजा बाबू सिंह ने सभी ट्रेनिंग स्कूलों को निर्देश दिया है कि भगवद्गीता शाश्वत ज्ञान का स्रोत है, जो सही जीवन जीने की कला सिखाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि पवित्र मार्गशीर्ष माह में रात के समय ध्यान से पहले प्रशिक्षुओं को गीता का एक अध्याय पढ़ाया जाए, ताकि वे मानसिक रूप से अधिक शांत और संतुलित रह सकें।
रामचरितमानस के बाद गीता का पाठ
इससे पहले जुलाई 2025 में नए आरक्षकों की ट्रेनिंग के दौरान ‘रामचरितमानस’ का सामूहिक पाठ शुरू कराया गया था। उस समय प्रशिक्षुओं को भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेने की सलाह दी गई थी। अब भगवद्गीता का अध्ययन इस श्रृंखला का अगला कदम है, जिसका उद्देश्य नैतिक मूल्यों और कर्तव्य भावना को मजबूत करना है।
आठ ट्रेनिंग सेंटर्स में लागू होंगे निर्देश
राज्य के रीवा, उमरिया, पचमढ़ी, इंदौर, उज्जैन, भौंरी-भोपाल, तिघरा-ग्वालियर और सागर के आठ पुलिस ट्रेनिंग सेंटर्स में करीब 4,000 नवआरक्षक प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन केंद्रों पर अब नियमित रूप से धार्मिक और प्रेरणादायक ग्रंथों के अध्ययन की परंपरा शुरू की जाएगी।
अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा पर फोकस
इस पहल का उद्देश्य पुलिस कर्मियों में अनुशासन, चरित्र निर्माण और नैतिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है। अधिकारियों का मानना है कि जब प्रशिक्षण के दौरान नैतिक शिक्षा और आध्यात्मिकता का समावेश होता है, तो बेहतर पुलिसिंग और मानवता की भावना दोनों विकसित होती हैं।