मध्य प्रदेश की राजनीति में गणतंत्र दिवस के मौके पर उस समय हलचल मच गई जब सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बीच मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह खंडवा में आयोजित जिला स्तरीय समारोह में मुख्य अतिथि बने और उन्होंने ध्वजारोहण किया। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान के कारण पहले से घिरे मंत्री की मौजूदगी ने राजनीतिक और कानूनी बहस को और तेज कर दिया।
खंडवा में हुआ भव्य समारोह
गणतंत्र दिवस पर खंडवा के स्टेडियम ग्राउंड में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने परेड की सलामी ली, मुख्यमंत्री का संदेश पढ़ा और खुले वाहन में सवार होकर जवानों व विद्यार्थियों की टुकड़ियों का निरीक्षण किया। इस दौरान जिले में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया।
विवाद की जड़: कर्नल सोफिया कुरैशी पर बयान
मंत्री विजय शाह इन दिनों भारतीय सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान को लेकर विवादों में हैं। आरोप है कि उनकी टिप्पणी सेना की गरिमा और महिला अधिकारियों के सम्मान के खिलाफ मानी गई। इसी मामले ने उन्हें राजनीतिक और कानूनी घेरे में ला खड़ा किया है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण पर मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ कहा है कि लगाए गए आरोपों पर स्पष्ट और समयबद्ध कार्रवाई की जाए। इस अल्टीमेटम के बाद से ही राज्य की राजनीति में मंत्री की भूमिका और भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
प्रोटोकॉल में बदलाव नहीं, विपक्ष के सवाल
कोर्ट की टिप्पणी और तय समयसीमा के बावजूद राज्य सरकार ने मंत्री विजय शाह के प्रोटोकॉल में कोई बदलाव नहीं किया। गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर उन्हें खंडवा में मुख्य अतिथि बनाए जाने से विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। विरोधी दलों का कहना है कि जब मामला सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन है, तब ऐसी जिम्मेदारी देना गलत संदेश देता है।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। समर्थकों का कहना है कि जब तक अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक मंत्री अपने दायित्व निभाने के लिए स्वतंत्र हैं, जबकि आलोचक इसे नैतिकता से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम और राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हुई है।