मध्य प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र से पहले ही शिक्षा का खर्च चर्चा में आ गया है। निजी स्कूलों ने नर्सरी से कक्षा 5 तक के पाठ्यक्रम से NCERT की किताबों को हटाकर निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लागू कर दी हैं। एक-एक किताब की कीमत 600 रुपये तक पहुंच रही है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
प्राथमिक कक्षाओं से हटाई गईं एनसीईआरटी की पुस्तकें
राजधानी सहित कई शहरों के निजी स्कूलों ने पांचवीं तक के कोर्स में बदलाव किया है। सिलेबस सूची में एनसीईआरटी की जगह प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें शामिल हैं। शिक्षा विभाग की गाइडलाइन के बावजूद इस बदलाव ने सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों का कहना है कि सस्ती और मानक किताबों की जगह महंगी पुस्तकों को अनिवार्य करना उचित नहीं है।
नर्सरी से 10 किताबें, कीमतें 600 तक
नर्सरी कक्षा में 8 से 10 किताबें शामिल की गई हैं। कुछ किताबों की कीमत 150 से 250 रुपये है, जबकि बड़ी कक्षाओं में यह कीमत 600 रुपये तक पहुंच रही है। कक्षा दो में 11 किताबें और कक्षा पांच में 14 किताबें निर्धारित की गई हैं। छठवीं से एनसीईआरटी की छह किताबें शामिल की गई हैं, लेकिन तब तक अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदनी होंगी।
1 अप्रैल से शुरू होंगी कक्षाएं
एक अप्रैल से नए सत्र की शुरुआत हो रही है। प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और स्कूलों ने ऑनलाइन सिलेबस जारी कर दिया है। राजधानी में करीब 150 CBSE से संबद्ध स्कूल हैं, जहां महंगी किताबों को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आई हैं। किताबों के साथ यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री का खर्च भी जुड़ रहा है।
जांच के निर्देश, शिक्षा विभाग सख्त
जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। स्कूलों से किताबों की सूची मांगी गई है और सिलेबस से मिलान किया जा रहा है। यदि गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अभिभावक राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।