राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग ने 18 जून को मतदान की तारीख तय कर दी है, जिसमें मध्य प्रदेश की तीन अहम सीटों पर भी वोटिंग होगी। इन सीटों के लिए सियासी दलों के भीतर दावेदारों की लंबी कतारें लग गई हैं। मौजूदा विधानसभा समीकरण को देखते हुए बीजेपी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है, लेकिन कांग्रेस भी रणनीति के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
चुनाव का पूरा शेड्यूल घोषित
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 1 जून 2026 से नामांकन के साथ शुरू होगी। उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे, जबकि 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 11 जून नाम वापसी की अंतिम तारीख तय की गई है। इसके बाद 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और शाम 5 बजे से मतगणना शुरू की जाएगी।
एमपी में किसका पलड़ा भारी
मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा समीकरण बीजेपी के पक्ष में नजर आते हैं। विधानसभा में बीजेपी के 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। इसी आधार पर तीन में से दो सीटों पर बीजेपी की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है।
बीजेपी में दावेदारी की लंबी कतार
भाजपा में राज्यसभा टिकट के लिए कई बड़े नाम चर्चा में हैं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य, विनोद गोटिया, अरविंद भदौरिया और कांग्रेस से आए रामनिवास रावत जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा नरोत्तम मिश्रा और कुछ युवा चेहरों के साथ-साथ साधु-संतों को भी मौका दिए जाने की अटकलें हैं।
कांग्रेस में भी मंथन तेज
कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह की सीट खाली होने के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है। हालांकि उन्होंने खुद दोबारा राज्यसभा में जाने से इनकार कर दिया है। कांग्रेस खेमे में पूर्व सांसद नकुलनाथ, कमलेश्वर पटेल, अरुण यादव, सज्जन सिंह वर्मा, मीनाक्षी नटराजन और प्रदीप अहिरवार जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं। पार्टी युवा चेहरे को भी आगे कर सकती है।
मौजूदा स्थिति और सियासी समीकरण
मध्य प्रदेश की कुल 11 राज्यसभा सीटों में से 8 पर बीजेपी और 3 पर कांग्रेस का कब्जा है। मौजूदा चुनावी समीकरण भी इसी दिशा में इशारा कर रहे हैं कि बीजेपी अपनी बढ़त बनाए रख सकती है। हालांकि क्रॉस वोटिंग या अंतिम समय की रणनीति बदलाव चुनाव के नतीजों में अप्रत्याशित मोड़ ला सकते हैं।
सियासी हलचल और बढ़ी निगाहें
राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों में अंदरूनी मंथन तेज हो गया है। टिकट वितरण और उम्मीदवार चयन को लेकर आने वाले दिनों में तस्वीर साफ होगी। फिलहाल सभी की नजर 18 जून की वोटिंग पर टिकी है, जो एमपी की सियासत में एक बार फिर शक्ति संतुलन को परिभाषित करेगी।