मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और पूर्व विधायकों के वेतन में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। संसदीय कार्य विभाग द्वारा वेतन–भत्तों में बढ़ोतरी से जुड़े प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया गया है, जिसे सहमति के लिए मुख्यमंत्री के पास भेजा गया है। यदि प्रस्ताव पास हो जाता है, तो नौ साल बाद प्रदेश के जनप्रतिनिधियों की सैलरी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। आने वाले शीतकालीन सत्र में इस प्रस्ताव को विधेयक के रूप में पेश किया जाना तय है।
शीतकालीन सत्र में पेश होगा वेतन बढ़ोतरी विधेयक
1 दिसंबर से शुरू हो रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में वेतन–भत्तों में बढ़ोतरी से जुड़ा विधेयक लाने की तैयारी है। साल 2025 के बजट सत्र में कई विधायकों ने वेतन बढ़ाने की मांग उठाई थी। तत्कालीन चर्चा में विधानसभा अध्यक्ष ने संकेत दिए थे कि सरकार समिति बनाकर इस पर विचार कर सकती है।
सीएम की सहमति पर बनी थी तीन सदस्यीय समिति
27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद तीन सदस्यीय समिति गठित हुई थी।
इसमें उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, अजय विश्नोई और सचिन यादव शामिल किए गए।
संसदीय कार्य विभाग के अपर सचिव अनुपम राजन को सदस्य सचिव बनाया गया था।
इस समिति ने वेतन, भत्ते और पेंशन को लेकर विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है।
समिति ने वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी का प्रस्ताव सौंपा
तैयार प्रस्ताव राज्य शासन को भेज दिया गया है। प्रस्ताव में वर्तमान वेतन संरचना को संशोधित कर बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है। सबसे अहम बात यह है कि इसमें पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने का भी उल्लेख है, जो लंबे समय से चर्चा में था।
विधायक की सैलरी में 54% तक बढ़ोतरी संभव
सूत्रों के अनुसार, यदि प्रस्ताव पास होता है तो विधायकों का वेतन लगभग 54% बढ़कर 1 लाख 70 हजार रुपये प्रति माह हो सकता है।
वहीं, पूर्व विधायकों की पेंशन में 65–66% तक वृद्धि का सुझाव दिया गया है।
यह वृद्धि लगभग नौ वर्षों बाद लागू होगी, इसलिए इसे व्यापक बदलाव माना जा रहा है।