छिंदवाड़ा नगर निगम में मृत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नाम पर जारी हो रहा था वेतन, फेस अटेंडेंस सिस्टम से खुला मामला, जांच कमेटी गठित
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां नगर निगम में मृत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नाम पर महीनों से वेतन जारी किया जा रहा था। जब नए फेस अटेंडेंस सिस्टम का ट्रायल शुरू हुआ तो गड़बड़ी का खुलासा हुआ। अब निगम प्रशासन ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
फेस अटेंडेंस सिस्टम से खुली पोल
नगर निगम ने हाल ही में कर्मचारियों की हाजिरी दर्ज करने के लिए फेस अटेंडेंस सॉफ्टवेयर लागू किया था। ट्रायल के दौरान पाया गया कि रिकॉर्ड में दर्ज 1935 कर्मचारियों में से केवल 1650 ही प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। यह अंतर काफी बड़ा था, जिससे अधिकारियों को शक हुआ कि कई नाम फर्जी या निष्क्रिय हो सकते हैं।
मृत और रिटायर्ड कर्मचारियों के नाम सक्रिय
जांच में पाया गया कि कई ऐसे कर्मचारी हैं जो अब जीवित नहीं हैं या फिर सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनके नाम अभी भी वेतन सूची में दर्ज हैं। इससे यह संकेत मिला कि वर्षों से इन नामों पर वेतन जारी किया जा रहा था। यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला है बल्कि करोड़ों रुपये के घोटाले की भी संभावना जताई जा रही है।
तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित
निगम आयुक्त के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई है, जिसमें उपायुक्त रोशन सिंह बाथम, कमलेश निरगुडकर और अधीक्षक मोहन नागदेव शामिल हैं। यह टीम कर्मचारियों की वास्तविक संख्या और वेतन भुगतान की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है। रिपोर्ट जल्द ही आयुक्त को सौंपी जाएगी।
हर माह करोड़ों का वेतन खर्च
नगर निगम में वर्तमान में करीब 1935 कर्मचारियों के नाम पर हर माह लगभग चार करोड़ रुपये का वेतन खर्च दिखाया जा रहा है। ऐसे में मृत और फर्जी कर्मचारियों के नाम पर जारी वेतन से निगम को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।