मोबाइल और इंटरनेट ने जिंदगी को आसान जरूर बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। हर दिन लोग नए-नए तरीकों से ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। इसी खतरे को देखते हुए मध्य प्रदेश में ‘सेल्फ क्लिक 2.0 अभियान’ शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को डिजिटल दुनिया के खतरों से परिचित कराना और उन्हें सतर्क रहने के लिए जागरूक करना है ताकि एक गलत क्लिक उनकी जिंदगी की कमाई पर भारी न पड़ जाए।
बदल रहे हैं साइबर ठगी के तरीके
तकनीक के विस्तार के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। पहले जहां फर्जी कॉल या मैसेज तक मामला सीमित था, वहीं अब एपीके फाइल, नकली वेबसाइट, फर्जी निवेश और सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को जाल में फंसाया जा रहा है। ठग नए तरीके अपनाकर लोगों की निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।
इन 14 तरीकों से बनाते हैं शिकार
अभियान के तहत बताया गया है कि साइबर अपराधी फिशिंग लिंक, ओटीपी फ्रॉड, फर्जी कॉल, बैंक केवाईसी अपडेट, यूपीआई धोखाधड़ी, डेबिट-क्रेडिट कार्ड फ्रॉड, सिम स्वैप, नकली ऐप, ऑनलाइन शॉपिंग, लॉटरी, फर्जी जॉब ऑफर, रोमांस ट्रैप, क्रिप्टो निवेश और रिमोट एक्सेस ऐप के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं।
इन गलतियों से बचना जरूरी
साइबर अपराधियों से बचने के लिए किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पासवर्ड, पिन, सीवीवी और बैंक संबंधी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा किसी भी संदिग्ध लिंक, क्यूआर कोड या फाइल पर क्लिक करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है।
ठगी होने पर तुरंत उठाएं यह कदम
यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे बिना समय गंवाए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय रहते शिकायत करने पर रकम वापस मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल दौर में सतर्कता और जानकारी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। छोटी सी लापरवाही बड़ी आर्थिक परेशानी का कारण बन सकती है, इसलिए हर ऑनलाइन गतिविधि में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।